फतेहगढ़ रेंज में फिर एक बार वनकर्मी से झूमा झटकी ओर गाली गलौच

गुना । वन मंडल गुना आज प्रदेश में वनभूमि पर हुए अतिक्रमण में प्रथम स्थान प्राप्त कर कर बैठा है वही वन विभाग के आला अधिकारियों के उदासीन रवैये ने अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण करने के लिए और क्लीन चिट दे दी है बमोरी क्षेत्र से अतिक्रमणकारी हजारों हेक्टेयर वनभूमि से जंगलों का नामोनिशान मिटाकर खेतों में तब्दील कर चुके हैं वही राजनैतिक संरक्षण के चलते छोटी मोटी कार्रवाई करने वाले वन रक्षकों की जान पर बन आती है । वन भूमि पर लगातार हो रहे अतिक्रमण पर वन विभाग के आला अधिकारीयों की चुप्पी क्षेत्र से अतिक्रमण और विवादों के रूप में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है ।
ताजा मामला फतेहगढ़ रेंज से एक वनकर्मी के साथ शिकारी समुदाय के कुछ लोगों द्वारा झूमा- झटकी, अश्लील गालियाँ देने व जान से मारने की धमकी का मामला प्रकाश में आया है । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त घटनाक्रम होने के बाद वनकर्मी अपनी फरियाद लेकर फतेहगढ़ थाने में भी पहुंचा था लेकिन पुलिस द्वारा आवेदन लेकर उसे चलता कर दिया गया ।
आवेदक के द्वारा पुलिस को दिए आवेदन अनुसार फतेहगढ़ रेंज प्रभारी के मौखिक आदेशानुसार बीटगार्ड पूर्वी फतेहगढ़ , शासकीय कार्य करवा रहा था तभी डोवरा रोड पर पहलवान शिकारी , हेमराज शिकारी ने मौके पर आकर मेरे साथ झूमाझटकी की व मा बहन की गंदी गन्दी गालिया दी वही दुबारा बीट में आने पर हाथ पैर काटने व जान से मारने की भी धमकी दी ऐसी स्थिति में वनकर्मी शासकीय कार्य कर पाने में अपने आप को असमर्थ पा रहा है ।
वही इस मामले में वनमण्डलाधिकारी गुना से सम्पर्क करने पर उनका मोबाइल नेटवर्क से बाहर आया ।

फतेहगढ़ रेंज में फिर एक बार वनकर्मी से झूमा झटकी ओर गाली गलौच

गुना । वन मंडल गुना आज प्रदेश में वनभूमि पर हुए अतिक्रमण में प्रथम स्थान प्राप्त कर कर बैठा है वही वन विभाग के आला अधिकारियों के उदासीन रवैये ने अतिक्रमणकारियों को अतिक्रमण करने के लिए और क्लीन चिट दे दी है बमोरी क्षेत्र से अतिक्रमणकारी हजारों हेक्टेयर वनभूमि से जंगलों का नामोनिशान मिटाकर खेतों में तब्दील कर चुके हैं वही राजनैतिक संरक्षण के चलते छोटी मोटी कार्रवाई करने वाले वन रक्षकों की जान पर बन आती है । वन भूमि पर लगातार हो रहे अतिक्रमण पर वन विभाग के आला अधिकारीयों की चुप्पी क्षेत्र से अतिक्रमण और विवादों के रूप में स्पष्ट रूप से देखी जा सकती है ।
ताजा मामला फतेहगढ़ रेंज से एक वनकर्मी के साथ शिकारी समुदाय के कुछ लोगों द्वारा झूमा- झटकी, अश्लील गालियाँ देने व जान से मारने की धमकी का मामला प्रकाश में आया है । सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उक्त घटनाक्रम होने के बाद वनकर्मी
अपनी फरियाद लेकर फतेहगढ़ थाने में भी पहुंचा था लेकिन पुलिस द्वारा आवेदन लेकर उसे चलता कर दिया गया ।
आवेदक के द्वारा पुलिस को दिए आवेदन अनुसार फतेहगढ़ रेंज प्रभारी के मौखिक आदेशानुसार बीटगार्ड पूर्वी फतेहगढ़ , शासकीय कार्य करवा रहा था तभी डोवरा रोड पर पहलवान शिकारी , हेमराज शिकारी ने मौके पर आकर मेरे साथ झूमाझटकी की व मा बहन की गंदी गन्दी गालिया दी वही दुबारा बीट में आने पर हाथ पैर काटने व जान से मारने की भी धमकी दी ऐसी स्थिति में वनकर्मी शासकीय कार्य कर पाने में अपने आप को असमर्थ पा रहा है ।
वही इस मामले में वनमण्डलाधिकारी गुना से सम्पर्क करने पर उनका मोबाइल नेटवर्क से बाहर आया ।

कलेक्टर साहब को फोन लगाकर शिकायत करो हाथ मजबूत होंगे तब ही होगी कार्यवाही

गुना । वन भूमि पर हो रहे अतिक्रमण की शिकायत करने के बाद भी आवेदक की फरियाद वन मंडल अधिकारियों तक नहीं पहुंच पा रही है और जहां तक आवेदक की फरियाद पहुंची वहां अधिकारी अपनी बेबसी का दुखड़ा सुनाते नजर आए । गुना वनमण्डल में लगातार चल रही अवैध कटाई ओर अतिक्रमण रुकने का नाम नही ले रहा है ताजा मामला फतेहगढ़ बमोरी के जंगल से सामने आ रहा है जिसमे फरियादी ओर रेंजर से बातचीत होना बताया जा रहा है वायरल ऑडियो में फरियादी के द्वारा अतिक्रमण की शिकायत करने पर रेंजर के द्वारा अपने हाथ मजबूत न होने से कार्यवाही न होना बताया जा रहा वही बार बार आवेदक से SDM ओर कलेक्टर को शिकायत करने के लिए आग्रह किया जा रहा है वही वायरल ऑडियो के बाद पूरे वन महकमे में हड़कम्प मच गया है कि जब रेंजर के ही हाथ मजबूत नही तो भला एक वनरक्षक बीट में कैसे अतिक्रमण ओर अवैध कटाई को रोक पायेगा हालांकि शारदा एक्सप्रेस वायरल ऑडियो की पुष्टि नही करता है ।


दबाब में पूरा वन महकमा – सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार लगातर हो रही अवैध कटाई ओर अतिक्रमण के पीछे वन महकमे के दबाव में कार्य करना सामने आ रहा है अभी हाल ही में वन अमले की अतिक्रमण बेदखली की कार्यवाही में वन अमले पर ही पुलिस में FIR दर्ज कर ली गयी थी वही ऊमरी सबरेंज के दो वनकर्मियों की मारपीट मामले में भी पुलिस FIR करवाने के लिए गुना व बमोरी वन अमले को थाने में एकत्रित होने पड़ा था ।बजह कुछ भी हो लेकिन वायरल ऑडियो से इतना तो स्पष्ट है कि वनों में होने बाले अतिक्रमण ओर अवैध कटाई पर वन अमला तब तक कार्यवाही नही करेगा जब तक फरियादी कलेक्टर से शिकायत नही करेगा क्योंकि वन विभाग के हाथ मजबूत नही रहे है अब देखना होगा कि ऑडियो वायरल होने के बाद इस मामले में वन विभाग आगे कुछ कार्यवाही करता है या हाथ मजबूत होने तक इंतजार होता रहेगा ।

वनभूमि पर हो रहा लगातार अतिक्रमण , सी.एम. हेल्पलाइन पर शिकायत के बाद भी नही हुई कार्यवाही

गुना । गुना वनमण्डल के फतेहगढ़ रेंज के ग्राम सिलावटी में लगातार वनभूमि पर अतिक्रमण किया जा रहा है वही लगातार हो रहे अतिक्रमण को रुकवाने के लिए राकेश शर्मा के द्वारा 12 सितम्बर 2021 को मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर कॉल करके  वनभूमि पर अतिक्रमण रोकने हेतु शिकायत दर्ज करवाई गई थी तब वनभूमि पर अतिक्रमणकारियों के द्वारा मक्का की फसल बोई गई थी किन्तु वन विभाग के उदासीन रवैया या कहे कि मिलीभगत का नतीजा रहा कि शिकायत दर्ज होने के बाद भी वन अमला अतिक्रमण पर पर्दा डालते हुए शिकायत को बंद करने का प्रयास करता रहा वही शिकायतकर्ता राकेश शर्मा के द्वारा एक बार फिर से मुख्यमंत्री हेल्पलाइन पर कॉल करके बताया गया कि अतिक्रमणकारियों के द्वारा वनभूमि पर मक्का की फसल बोकर काट ली गयी है और एक बार पुनः सरसों की फसल बो दी गयी है मामला तूल पकड़ता देख व L 4 पर शिकायत पहुंचने पर मामला DFO गुना के संज्ञान में आने पर वनभूमि पर कब्जा करने वाले अतिक्रमणकारियों के विरूद्ध वन अमले के द्वारा मामला पंजीबद्ध करके जांच में लिया गया है व धारा 80 का नोटिस जारी किया गया है वही इस मामले में सूत्रों के हवाले से खबर है कि धारा 80 के नोटिस जारी करने के बाद मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा ।वही इस मामले में हो रही लेटलतीफी ओर वनकर्मियों के उदासीन रवैया कहि न कही वनभूमि पर अतिक्रमण को बढ़ावा देता हुआ नजर आ रहा है अब देखना होगा कि वनभूमि पर से  अतिक्रमणकारियों को वन विभाग बेदखल कर पाता है या वनभूमि पर अतिक्रमण का खेल यूँही चलता रहेगा ।

नपा के गैर जुम्मेदारना रबैये के चलते सड़कों पर पसरा अबैध अतिक्रमण, यातायात सुगम बनाने किया गया था मार्ग चौड़ीकर, जहां लगता है वाहनों का मेला, आए दिन होती है दुर्घटना

गुना । (महेश सोनी, शारदा एक्सप्रेस) शहर मे यातायात सुगम बनाने हेतु नानाखेड़ी मंडी से लेकर मारुति शोरूम तक सड़कों का चौड़ीकरण किया गया है।  निश्चित ही इससे शहर की सुंदरता बढ़ी है। यातायात सुगम बनाने के उद्देश्य सड़कों का चौड़ीकरण किया गया था, मगर नगर प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों की अनदेखी के चलते नानाखेड़ी से लेकर ओवरब्रिज तक दुकानदारों ने इस कदर अवैध अतिक्रमण कर रखा है कि यहां आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। जिसके चलते विगत दिवस एक गंभीर हादसा देखने को मिला जहां सामने की तरफ से आ रहे एक मोटरसाइकिल सवार को बचाने के चक्कर में एक कार बीच सड़क में खड़े शरीयों से भरे ट्रक में जा घुसी। इस दुर्घटना में एक बहुत बड़ी अनहोनी टल गई, कार पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गई, और वाहन में सवार दो व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए हैं।हमेशा से यह देखा गया है कि प्रशासन के अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही के चलते किए गए सुधार कार्य कुछ ही दिनों बाद धूमिल होते नजरआते है। हनुमान चौराहे से नानाखेड़ी तक मुख्य मार्ग पर बिल्डिंग मटेरियल विक्रेताओं व “चार पहिया विक्रय” कार बाजार मेला लगा रहता है। दोनों तरफ से दुकानदारों के द्वारा किए गए अतिक्रमण के चलते आए दिन हादसे होते रहते हैं। इस क्षेत्र में सड़क किनारे सैकड़ों कुमटिया भी रखी हो गई हैं जिन्हें कोई देखने वाला नहीं है। यहां नगर प्रशासन के  अधिकारियों व कर्मचारियों की लापरवाही देखने को मिलती है। जिनकी उदासीनता के चलते अबैध सड़कों पर जमकर अतिक्रमण पसर रहा है। अगर नगर प्रशासन के द्वारा समय-समय पर मॉनिटरिंग की जाती रहती होती तो आज शहर की यह स्थिति नहीं होती। सड़कों का चौड़ीकरण आने जने वाले वाहन चालकों की सुविधा के लिएकिया गया था, जहां अनदेखी के चलते “अंधेर नगरी चौपट राजा” वाली कहावत सार्थक होती दिख रही है। अब इन मनचली अतिक्रमणकारियों पर प्रशासन क्या कार्यवाही करता है यह तो आने वाला समय ही बताएगा।

मंडी प्रशासन करता है नियमित टैक्स वसूलीबावजूद इसके हालात बद से बदतरमंडी प्रशासन की अनदेखी के चलते पुरानी गल्ला मंडी में जमकर हो रहा है, अतिक्रमण, मुख्य मार्ग पर दुकानदारों ने कर रखा है कब्जा

गुना।  शहर की पुरानी गल्ला मंडी इन दिनों अतिक्रमण के साये में है। जहां गल्ला मंडी में स्थित दुकानदारों द्वारा जमकर अतिक्रमण किया जा रहा है। पचासों शिकायतें करने के बाद भी मंडी प्रशासन के अधिकारी,  कर्मचारी नींद में सोए हुए हैं। बस इसी तरह की लापरवाही 1 दिन प्रसाधन के लिए नासूर बन जाती है। फिर मुहिम चलाने के बाद भी लोगों के अतिक्रमण हटाना प्रशासन को टेढ़ी खीर साबित होती हैं।  पुरानी गल्ला मंडी में दुकानदारों द्वारा इस कतर अतिक्रमण किया गया है कि मुख्य मार्ग पर वाहन निकालना भी बड़ा मुश्किल है। यदि किसी को इमरजेंसी लग जाए तो यहां हॉस्पिटल जाने के लिए ऑटो वाला भी आने के लिए तैयार नहीं होता है, जोकि यहां के  रहवासियों के लिए एक बड़ी चुनौती है।  पूर्व में जिला प्रशासन के अधिकारियों द्वारा भारी मशक्कत के बाद नामुमकिन समझे जाने वाले  क्षेत्र पुरानी गल्ला मंडी से अतिक्रमणकारियों द्वारा काफी हद तक अतिक्रमण को लेकर स्थिति सामान्य कर दी गई थी। मगर यहां वर्तमान में जिम्मेदार अधिकारियों की मक्कारी मक्कारी साफ साफ नजर आती है।  मंडी प्रशासन पुरानी गल्ला मंडी से टैक्स के रूप में नियमित वसूली तो करता है। मगर व्यवस्थाओं के नाम पर कुछ है। पुरानी गल्ला मंडी के हालात यह है कि यहां सड़कों पर दुकानदारों का कब्जा है। जिसके चलते यहां से गुजरने वाले आम आदमी को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। इसकी सूचनाकई बार मंडी प्रशासन के अधिकारियों को बताई गई है। मगर यहाँ “अंधेर नगरी चौपट राजा” वाली कहावत सार्थक सिद्ध होती नजर आती है। अब देखना यह है कि मंडी प्रशासन की जिम्मेदार अधिकारी व कर्मचारीयों द्वारा आगे क्या कदम उठाए जाते है।

शहर के व्यततम क्षैत्रों में आवारा सांड़ो का आतंक, जिम्मेदारों की सुस्ती के चलते आम लोग झेल रहे हैं नुकसान

गुना । (शारदा एक्सप्रेस) शहर में बढ़ते आवारा सांड़ लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। सांड़ो के बीच होने वाली लड़ाईयों के चलते पास से गुजरने वाले लोग घायल हो चुके है। वहीं लोगों को सामान, वाहन आदि के गिरने से भी नुकसान उठाना पड़ रहा है ।
शहर के सबसे व्यस्त सड़कों व पुरानी मंडी, मेन रोड पर हर समय गाय-साड़ का अक्सर जमावड़ा लगा रहता है। शहर में घूम रहे अवारा पशुओं के बारे में प्रशासन को कई बार शिकायत करने के बाद भी स्थायी समाधान नहीं निकाला गया। इस समस्या के समाधान को लेकर नगर प्रशासन ने जल्द ही कोई ठोस कदम उठाना चाहिए । अब ये सांड़ जान का खतरा बनकर शहर के व्ययत्तम इलाकों में घूम रहे हैं। कब कौन सा सांड़ किस राहगीर पर हमला कर दे, इसका अंदाजा किसी को नहीं है।
रविवार दोपहर कि समय पुरानी गल्ला मंडी में 2 साड़ो की लड़ाई हुई। जिसमें साइकिल सहित कई वाहन क्षतिग्रस्त हो गए। और एक बड़ी दुर्घटना होते होते टल गई जिसमें एक महिला व एक बालक बाल-बाल बच गए। शहर में आवारा सांडों का इस कदर आतंकी है, कि इस तरह की दुर्घटनाएं आए दिन शहर में देखने को मिलती हैं। पूर्व में भी इन आवारा सांडों ने कई महिला व पुरुषों को अपना शिकार बनाया। जिसमें वह गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जिले भर में बनाई गईं गोशालाओं में इन सांड़ों को पकड़कर भरण-पोषण करने का दावा तो किया जा रहा है लेकिन निचले स्तर पर ड्यूटी में लापरवाही के चलते सांड़ व गोवंश छुट्टा घूम रहे हैं। सांड़ो की आपसी लड़ाई इतनी खुंखार हो जाती है कि आवागमन घंटों बाधित हो जाता है। ठेला खोमचे वालों का नुकसान तो होता ही है। आम लोगों के वाहन क्षतिग्रस्त हो जाते हैं। बीच-बचाव करने गए लोगों पर भी सांड़ टूट पड़ते हैं। तमाम लोगों ने इसकी शिकायत नगरपालिका से की है। बावजूद इसके महकमा इस गंभीर मामले को लेकर सुस्ती बरत रही है।

वन अफसरों की लापरवाही के चलते लाखों रुपए के पौधे बन रहे हैं आवारा मवेशियों का चारा ,खबर प्रकाशन के बाद भी नींद से नही जागा वन विभाग

गुना । वन विभाग की लापरवाही और गैरजिम्मेदारी वाला रवैया यह साफ साफ दिखाई दे रहा है जहां सरकार द्वारा लाखों रुपए का बजट वन विभाग को आवंटित कर प्लांटेशन लगवाए गए वही वन विभाग लापरवाही वरत रहा है जिसका नतीजा प्लांटेशनों में आवारा मवेशियों द्वारा प्लांटेशनों में सरेआम सेंध लगाकर पौधों का नष्टीकरण किया जा रहा है । विभाग द्वारा प्लांटेशन तो लगाए गए लेकिन उसकी सुरक्षा के इंतजाम में लापरवाही बरती गई वही जिम्मेदार अधिकारी यह कहने से नहीं चूक रहे की बारिश की वजह से सुरक्षा घेरे मैं मुरम से पूराव हो गया जबकि हकीकत ये है कि वन विभाग ने जो नाली सुरक्षा के लिए खोदी है वो JCB मशीनों से खुदवाई गयी है जबकि बजट में श्रमिको से खुदवाने का प्रावधान है मशीनों से खोदी गयी नाली सही साइज की न होने से मवेशियों के द्वारा आसानी से प्लान्टेसनो की सुरक्षा में सेंध लगाई जा रही है वही एक जिम्मेदार अधिकारी के द्वारा मशीन से नाली खोदने की बात भी स्वीकार की गई है । शारदा एक्सप्रेस द्वारा विगत 2 अक्टूबर को प्रकाशित खबर में प्लांटेशन में सुरक्षा इंतजामात और मवेशियों की घुसपैठ को लेकर खबर का प्रकाशन किया गया था खबर को लेकर जिम्मेदार अधिकारियों से चर्चा भी की गई थी लेकिन उसके बाद भी जिम्मेदार अधिकारी सरकार के लाखों रुपए को पशुओं के पेट का चारा बनाने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं ।
गौरतलब है कि वन मंडल की रेंज गुना दक्षिण के सिंहवासा चक्क , गुना उत्तर में टकनेरा, भिंडरा और सिमरोद , रेंज आरोन के किरर्या एवम बमोरी के रामपुर में कैंपा फंड से पौधारोपण किया गया है । लेकिन पौधारोपण की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के जिम्मेदार अधिकारियों ने महज औपचारिकता के लिए प्लांटेशन के चारों ओर नाली खोदकर सुरक्षा इंतजाम किया ताकि मवेशियों का प्रवेश प्लांटेशन के भीतर ना हो सके । आवारा मवेशियों की बढ़ती संख्या को लेकर कोई गहन इंतजाम ना होने पर मवेशी प्लांटेशन में आए दिन अपना उत्पात मचा रहे हैं वही लाखों रुपए के पौधों को अपने पेट का चारा बना रहे हैं प्लांटेशन में तैनात किए गए कर्मचारियों का भी दूर-दूर तक कोई अता पता नहीं रहता है और जिम्मेदार अधिकारी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर पल्ला झाड़ते नजर आते हैं एक तरफ सरकार के द्वारा करोड़ो रुपयो ख़र्च करके पौधरोपण को बढ़ावा दिया जा रहा है वही वन विभाग गुना के द्वारा लाखो पौधों को मवेशियों के चरने के लिए खुला छोड़ दिया गया है मामले को लेकर वनाधिकारियों की बेरुखी व लापरवाही खुलेआम देखी जा रही है हाल ही में रेंजर के संरक्षण में जंगल से सागौन कटवाकर मिलीभगत से फर्नीचर बनवाने का मामला भी मीडिया में सुर्खियों में बना हुआ है जब रक्षक ही भक्षक बनने लगे तो जंगलो का विनाश होना निश्चित है ।

लाखों रूपऐ खर्च करके लगाऐ कैम्पा प्लांटेशन की सुरक्षा में आवारा मवेशी लगा रहे हैं सेंध, पौधों की व्यापक सुरक्षा के लिऐ क्या विभाग कर पाऐगा कोई ठोस इंतजाम

गुना । गुना वनमण्डल में लगातार अवैध कटाई , अवैध उत्खनन ओर अतिक्रमण के मामले सामने आते रहे  किंतु अब वन विभाग की ओर से कराए गए कैम्पा प्लान्टेसनो में गम्भीर अनियमितताएं सामने आ रही है सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार गुना वनमण्डल की रेंज गुना दक्षिण में सिंगवासा चक गुना उत्तर में टकनेरा , भिंडरा ओर सिमरोद व बमोरी में रामपुर में कैम्पा फंड से पौधरोपन किया गया है जब पौधरोपण में अनियमितता की सूचना मिलने पर शारदा एक्सप्रेस की टीम ने प्लान्टेसनो पर जाकर देखा तो पाया कि पौधरोपण की सुरक्षा के लिए तारफेन्सिंग की जगह CPT खोदी गयी है  वही मौके पर मिले ग्रामीण से पूंछताछ करने पर टीम को पता चला कि पौधों की सुरक्षा के लिए जो गहरी नाली खोदी जाती है इसकी वन मुख्यालय से एक निश्चित साइज है जो 1.5×.90×.75 मीटर है जबकि वास्तविकता में देखने पर नाली बहुत सकरी व कम गहराई की खुदी मिली जिससे ग्राम के आवारा मवेशियों की टोली आसानी से प्लान्टेशनो में घुसती हुई दिखाई दी वही आवारा मवेशियों को भगाने के लिए एक अन्य ग्रामीण भागता हुआ दिखाई दिया जब शारदा एक्सप्रेस की टीम के द्वारा उससे जानकारी लेना चाही तो उनके द्वारा अपना नाम न छापने की शर्त पर बताया गया कि उक्त CPT खुदाई का कार्य JCB मशीन से किया गया है जबकि नियमानुसार उक्त कार्य के लिए श्रमिको को काम मे लगाया जाता है अब मामले में सच क्या है ये तो जांच के बाद सामने आ पायेगा किन्तु इतना स्पष्ट है कि वन अफसरों के द्वारा पौधरोपण की सुरक्षा में बरती जा रही लापरवाही के चलते लाखो के बजट को खर्च कर  किये गए पौधरोपण क्षेत्र में पौधों का नामो निशान मिलना मुश्किल हो जाएगा ।वही इस सम्बंध में चर्चा के लिए गुना रेंजर प्रेमचंद शर्मा से बात की गई तो उनके द्वारा बताया गया कि अतिबर्षा के कारण CPT पुर गयी है और आवारा मवेशियों की संख्या अधिक होने से समस्या आ रही है उन्होने कहा कि इसके लिये हमने मुख्यकार्यपालन अधिकारी जनपद पंचायत गुना को पत्र लिखकर ग्राम पंचायत को निर्देशित कर आवारा मवेशियों को गौशाला में पहुंचवाने हेतु लेख किया है दूसरी ओर वारिश खत्म होते ही पुनः CPT को दुरुस्त करवाया जाएगा हमारे बीटगार्ड ओर सुरक्षा श्रमिक लगातार आवारा मवेशियों को प्लान्टेसनो से बाहर भगाते है ।

जेव गरम करो और वनाधिकार लो, जंगल के रक्षक वने भक्षक, पैसे लेते वनरक्षक का वीडियो वायरल

गुना । जहाँ एक तरफ कई संगठन वनों के हो रहे विनाश को रोकने वृक्षारोपण में लगे हुऐ है वहीं जंगल के पहरेदार ही इन्हें नष्ट कर अपनी जेव गरम करने में लगे हैं । वनमण्डल गुना में लगातार वनों का विनाश किसी से छिपा नही है लगातार मीडिया में खबरे प्रकाशित होने पर भी जिम्मेदार अफसरों के कानों पर जू तक नही रेंगती है इसी का नतीजा है कि अब वनों के रक्षक ही भक्षक बन बैठे है ।
ताजा मामला फतेहगढ़ रेंज की बीट करराखेड़ा का है यहां बीटगार्ड वनभूमि पर कब्जा ओर पट्टे देने के लिए 2 से 5 हजार रुपयो तक बसूल कर रहा है जिसका वीडियो जमकर मीडिया व सोशल साइट्स पर वायरल हो रहा है वही जिम्मेदार अफसर अब मामले पर सफाई देते नजर आ रहे है ।
मामले को गम्भीरता से लेकर यदि वरिष्ठ स्तर से बीट करराखेड़ा की जांच करवाई जाए तो सेंकडो की संख्या में अवैध रूप से बोरिंग ओर हजारो हेक्टेयर वनभूमि पर अतिक्रमण साफ तौर से देखा जा सकता है किंतु वन अधिकारी व कर्मचारी मात्र पौधरोपण के नाम पर इत्रश्री करके बैठे है वहीं जमकर घूसखोरी को अंजाम दिया जा रहा है ।

पूर्व में हो चुका है वीडियो वायरल – अभी कुछ माह पूर्व ही गुना रेंज के एक वनरक्षक का पैसे लेते हुए वीडियो वायरल हुआ था जिसमे वह अधिकारियों के लिए अपशब्द बोलते हुए पैसे लेते दिखाई दे रहा था मामले ने जब तूल पकड़ा तो वनरक्षक को निलंबित कर मामले को रफा दफा कर दिया गया वही एक दूसरे मामले में वन विभाग के ही वनकर्मी के द्वारा प्लांटेशन से तार की चोरी की गई थी जिसे वन विभाग के अमले ने ही मोके पर पकड़ लिया था किंतु उस मामले में भी पुलिस में आपराधिक प्रकरण दर्ज न करवाकर मात्र निलम्बित करके मामले को दबा दिया गया ।
यदि इसी तरह वन विभाग के आला अधिकारी वन कर्मियों को अभयदान देते रहे तो वो दिन दूर नही जब गुना वनमण्डल मात्र कागजो तक ही सीमित रह जायेगा ।
मामले में शारदा एक्सप्रेस की टीम ने वनरक्षक चन्दन सिंह जाटव से बात की गई तो उन्होंने पैसे को उधार का लेना बताया किन्तु वीडियो वायरल होने की बात पर ग्रामीणों के द्वारा अतिक्रमण होने की बात बोली गयी अब सवाल उठता है यदि बनकर्मी को ग्रामीणों के द्वारा धमकी देकर अतिक्रमण किया जा रहा था तो बनकर्मी व वन विभाग के आला अफसरों के द्वारा कार्यवाही क्यों नही की गई ।