पत्रकारों पर झूठे आरोप लगाने वालों पर अब होगी कार्यवाही, मामला उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर का, जहाँ अनुपस्थित रहे स्टॉफ द्वारा पत्रकारों पर लगाए गए मंघड़ंत झूठे आरोप, पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक को दिया निष्पक्ष जांच हेतु आवेदन

गुना। मामला पुरापोसर उप स्वास्थ्य केंद्र का है। जहां कुछ दिवस पूर्व शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें बताया गया था कि उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर में स्टाफ अपने मनचले अंदाज में ड्यूटी करता है जब जिसकी इच्छा होती है तब आ जाता है और जब जिसकी इच्छा होती है तब वह चला जाता है। उक्त शिकायत पर पत्रकारों द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर पहुंच कर वहां दिख गया कि दोपहर 11:30 बजे 2 महिला कर्मचारी पहुंची, जिसके साथ ही बाकी स्टाफ अपनी ड्यूटी से नदारद पाया गया।जिसको लेकर न्यूज़ चैनलों व समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित की गई।
 दरअसल इस खबर को प्रकाशित करने का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लेकर नहीं है, बल्कि शासन द्वारा दूरस्थ आंचल में आमजन को दी जाने वाली सुविधाएं लोगों को मिल पा रही है या नहीं ? इसको लेकर पत्रकारों द्वारा कवरेज किया गया।
उक्त मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी गई। जिस पर कलेक्टर महोदय द्वारा स्वास्थ्य विभाग को जांच के आदेश दिए।अपनी अनियमितता को छुपाने हेतु बौखलाए कर्मचारियों द्वारा खबर प्रकाशन के लगभग 1 हफ्ते बाद पत्रकारों के खिलाफ मनगढ़ंत झूठे आरोपों को लेकर पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन दिया गया था।
इसी को लेकर समस्त पत्रकार गणों की और से झूठे शिकायत पत्र की निष्पक्ष जांच हेतु पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन दिया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण के चलते सरकारी विभाग के कर्मचारी बेखौफ नजर आते हैं। पत्रकारों द्वारा अनियमितता उजागर करने पर उन पर झूठे मनगढ़ंत आरोप लगा दिए जाते हैं। यह कोई नई बात नहीं है इससे पूर्व में भी अनियमितता उजागर किए जानेपत्रकारों पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगे हैं।
 यह है पूरा मामला

गुना जिले के ग्राम पुरापोसार उप स्वास्थ्य केंद्र का मामला है जहां स्थानीय निवासियों द्वारा शिकायत प्राप्त हुई थी कि उप स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते हैं। जब मन होता है तब आ जाते हैं और जब मन होता है तब चले जाते हैं। इसको लेकर जब मौके पर जाकर देखा तो लगभग 11:30 बजे स्टाफ की दो महिला कर्मचारियों द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र का ताला खोला जाना पाया गया।
अब यहां सवाल यह उठता है कि जब स्टाफ के कुछ कर्मचारी मौके पर मौजूद ही नहीं थे तो फिर शासकीय कार्य में बाधा, व ब्लैक मेलिंग को लेकर झूठा आवेदन क्यों दिया जा रहा है। जिस में अनुपस्थित कर्मचारियों की भी दस्तखत पाए गए हैं।
समाचार पत्रों में इसकी खबर प्रकाशित की गई एवं माननीय कलेक्टर महोदय को भी इसकी जानकारी संज्ञान में दी गई।
 जानकारी संज्ञान में आने पर जिला कलेक्टर द्वारा उक्त मामले में कार्यवाही करने के आदेश दिए गए।

वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण व नेताओं के दबाव में जांच में लीपापोती की आशंका 

 उक्त मामले में अधिकारियों के संरक्षण की बात सामने आई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ महोदय को अनियमितता की जानकारी देने के कई दिनों बाद तक कोई कार्यवाही नहीं की गई थी। इससे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उक्त कर्मचारियों को अपने वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
जानकारी में सामने यह भी आया है कि उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ श्रीमती रामवती बाई शर्मा जिनके पति पत्रकार हैं। कहीं ना कहीं पत्रकारिता की आड़ में रामवती शर्मा एवं स्टाफ के अन्य कर्मचारी अपने मनचले अंदाज में नौकरी करते देखे गए है।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि अधिकारियों के संरक्षण व नेताओं के दबाव के चलते उक्त मामले में जांच के नाम पर लीपापोती किए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले में स्थानीय अधिकारियों द्वारा पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए क्या  निष्पक्ष जाँच की जाएगी ?
या अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते यह धांधली इसी तरह से चलती रहेगी।

कहीं जिलाधीश कार्यवाही ना कर दे बौखलाए कर्मचारियों ने कलेक्ट्रेट पहुंचकर अनियमितता उजागर करने वाले पत्रकार पर कार्रवाई हेतु आवेदन

गुना । अक्सर देखा गया है की विभागीय कर्मचारी अपनी अनियमितताएं छुपाने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त कर बेखौफ ढंग से अपने कार्य में लिप्त रहते हैं । जब उनकी यह करतूतें आला अधिकारियों के संज्ञान में आती हैं तो वह अपनी काली करतूतों को छुपाने के लिए लामबंद होकर झूठी शिकायतों का सहारा लेते हैं । ठीक है ऐसा ही मामला जिले के ग्राम पुरापोसर स्थित उप स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों की अनुपस्थिति का सामने आया तो वहां पर पदस्थ स्वास्थ्य केंद्र के कर्मचारियों ने पत्रकार पर संगीन आरोप लगाकर पत्रकार के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर डाली ।लंबे समय से उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर समय पर ना खुलने केंद्र में कर्मचारियों की अनुपस्थिति सहित विभिन्न गड़बड़ियों को लेकर शिकायतें पत्रकार महेश सोनी को मिल रही थी जिसका खुलासा करने पहुंचे महेश सोनी ने ग्रामीणों सहित उप स्वास्थ्य केंद्र में उपस्थित मिले कर्मचारियों व ग्रामीणों से चर्चा की जिसके बाद यह पूरा मामला उन्होंने माननीय जिलाधीश महोदय के समक्ष प्रस्तुत किया वही जिलाधीश की ओर से उचित कार्यवाही करने की बात भी कही गई कहीं कार्यवाही ना हो जाए, तो बौखलाए कर्मचारियों ने लामबंद होकर पत्रकार महेश सोनी के खिलाफ गंभीर आरोप लगाकर आवेदन प्रस्तुत कर दिया । अब देखना होगा की जिलाधीश महोदय इस मामले को लेकर क्या कुछ उचित कार्यवाही उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ दोषी कर्मचारियों के खिलाफ करते हैं या फिर पत्रकार महेश सोनी को सच्चाई प्रदर्शित करने पर सजा का भागी बनना पड़ेगा ।

सोशल मीडिया पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप पर आपत्तिजनक टिप्पणी मामले को लेकर एकजुट हुआ राजपूत समाज, पुलिस अधीक्षक को ज्ञापन सौंपकर दोषी के खिलाफ की कार्यवाही की मांग

गुना । शुक्रवार को राजपूत समाज ने लामबंद होकर सोशल मीडिया पर वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप पर सोशल मीडिया के माध्यम से आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में पुष्पराज शर्मा पर एफ आई आर दर्ज करने की मांग की है । राजपूत समाज के मान सिंह भदोरिया ने बताया कि वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप सिर्फ राजपूतों के लिए नहीं बल्कि संपूर्ण राष्ट्र एवं हिंदुत्व की रक्षा के लिए मुगलों से लड़ते हुए बलिदान को प्राप्त हुए थे । उनकी वीरता के आगे बड़े-बड़े राजा महाराजा नतमस्तक थे परंतु कैंट निवासी पुष्पराज शर्मा द्वारा समस्त हिंदू जाति के लोगों की भावनाओं को आहत करते हुऐ सोशल मीडिया पर टिप्पणी कर आघात पहुंचाया गया है व महाराणा प्रताप जी का अपमान किया है जिसके लिए राजपूत समाज एवं सर्व हिंदू समाज ने एकजुट होकर पुलिस प्रशासन से पुष्पराज शर्मा पर एफ आई आर दर्ज करने की मांग की है साथ ही प्रशासन को कार्यवाही ना करने की एवज में विशाल धरना प्रदर्शन करने की भी चेतावनी दी है ।

स्वच्छता के नाम पर डिंडोरा पीटने वाली नगर पालिका के दावों की सच्चाई, गंदगी भरे ठिकानों ने की शहर की फिजा खराब

लाख प्रयास करने के बाद ही नहीं हुआ सुधार

गुना । शहर में गंदगी का गढ़ माने जाने वाले (हॉट रोड, बौहरा मस्जिद कंपलेक्स, व जाटपुरा) इन तीन ठिकानों ने पूरे शहर की फ़िजा को खराब कर के रख रखा है। शहर की साफ सफाई के नाम पर करोड़ों रुपए किए खर्च, मगर आज भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।बेशुमार गंदगी के मारे स्थानीय लोगों व यहाँ से आने जाने वालों लोगों का है बुरा हाल है । शहर में गंदगी का गढ़ माने जाने वाले स्थानों पर डस्टबिन की व्यवस्था नहीं हो पाई है ।मगर प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों व कर्मचारियों की मक्कारी की  “दाद”  देना पड़ेगी। जिन से 50 बार शिकायत करने के बाद भी, आज दिनांक तक कोई सुधार देखने को नहीं मिला । खैर आम लोगों की समस्या या परेशानी से इन्हें क्या लेना देना। क्या ऐसे ही बनेगा गुना शहर स्वच्छता में नंबर वन ?
वर्तमान स्थिति में स्वच्छता में नहीं, गंदी में नंबर वन है की कतार में नजर आता है गुना शहर। नगर प्रशासन के लिए यह एक चुनौती है,  अब देखना होगा कि जिम्मेदार इस चुनौती का मुकाबला करने में किस हद तक सफल होंगे।

पुलिस अधीक्षक गुना के मुख्य आतिथ्य में जेसीआई गुना सेंट्रल के तत्वधान में जेसीआई वीक सप्ताहिक कार्यक्रम हुए शुरू

2 हजार प्रतिभागियों के साथ मैराथन दौड़ व राष्ट्रीयगान का हुआ आयोजन

गुना । प्रति वर्ष अनुसार इस वर्ष भी जेसीआई गुना सेंट्रल द्वारा साप्ताहिक “जेसीआई वीक” कार्यक्रम का आयोजन रखा गया।
इस कार्यक्रम के तहत एक निश्चित तिथि को प्रतिवर्ष 9 से 15 सितंबर तक ग्रुप द्वारा कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है।

जेसीआई गुना सेंट्रल द्वारा अपने जेसी वीक प्रोग्राम के तीसरे दिन 11 सितंबर 2022 रविवार को एक विशाल मेराथन दौड़ का कार्यक्रम आयोजित किया गया।

उक्त कार्यक्रम गुना पुलिस अधीक्षक श्री पंकज श्रीवास्तव के मुख्य आतिथ्य में संपन्न हुआ।

संस्था अध्यक्ष जैसी आशीष बंसल द्वारा बताया गया कि मैराथन दौड़ से पहले दीप प्रज्वलन के साथ सामूहिक राष्ट्रगान किया गया।
मैराथन दौड़ शहर के लक्ष्मीगंज से प्रारंभ होकर सदर बाजार, हॉट रोड़, से कैंट रोड, होते हुए एसपी बंगला, अंबेडकर चौराहा, तेलगानी चौराहा होते हुए अपने गंतव्य स्थान मानव भवन पहुंची।

इस दौड़ में सीनियर पुरुष, महिला व जूनियर वर्गीय के लोगों ने हिस्सा लिया।

इस आयोजन में संस्था के साथ उनकी एक और संस्था जेसीआई गुना शक्ति ने भी सहयोग दिया। यह आयोजन में करीब 2000 प्रतिभागियों ने भाग लिया। इस आयोजन में हमारी संस्था के पूर्व अध्यक्ष जेसीसी मेंबर, जैसी लेडी और जैसी किड्स मौजूद थे। इस कार्यक्रम के दिवस संयोजक जैसी सुमित अग्रवाल दिवस सह संयोजक जेसी प्रतीक कत्याल सप्ताह संयोजक जैसी आशीष बिंदल जैसी राहुल तायल जेसी अश्विन सोनी। संस्था द्वारा प्रतिभागियों को प्रथम, द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार के साथ में सांत्वना पुरस्कार भी दिया गया! अंत में जेसी रवि अग्रवाल द्वारा आभार व्यक्त किया गया।

प्राइवेट स्कूलों की मनमानी वसूली के आगे मूकदर्शक बना शिक्षा विभाग

जिला शिक्षा अधिकारी सिसोदिया बोले लिखित में शिकायत दोगे तो होगी कार्रवाही

गुना । गांव, शहर, प्रदेश सहित दुनिया के शिक्षण संस्थान जहां बच्चों को ज्ञानरूपी शिक्षा देकर संस्कारिक, व जीवन में कुछ कर गुजरने के लायक बनाया जाता है।
जिन्हें हम गुरुजी के नाम से जानते है।

मगर आज के इस बदलते दौर में अब शिक्षा “शिक्षा” नहीं प्राइवेट स्कूल व्यवसायिक संस्थानों का रूप ले चुके है।

अब प्राइवेट स्कूल शिक्षा के नाम से नहीं, बल्कि पढ़ाई के नाम पर किसी भी तरह से बच्चों के पलकों को लूटने बाले संस्थानों के नाम से जाना जाने लगे है।

वहीं प्रशासन मूकदर्शक बना बैठा हुआ है।
और प्रशासन की नाक के नीचे नियम कायदों को ताक पर रखकर पढ़ाई के नाम पर जमकर लूट खसोट का कारोबार जमकर चल रहा है।

बेलगाम होते प्राइवेट स्कूल संचालकों ने नियम धरे ताक पर, जिनकी मनमर्जी के आगे प्रशासन हुआ नतमस्तक

शहर में प्राइवेट स्कूल संचालकों की मनमर्जी इस कदर चरम पर है कि इनके द्वारा सारे नियम कानूनों को ताक पर रखकर प्रशासन की नाक के नीचे नियमों की जमकर धज्जियां उड़ाई जा रही हैं।

जहां बच्चों की किताबें, कॉपियां, दो दो – तीन तीन ड्रेस सहित अनाप-शनाप दामों पर हल्के घटिया किस्म के टाई बेल्ट मनमाने दामों पर बिना किसी संशोधन के बच्चों के माथे मड़े जा रहे हैं।
जहां महज 40/- रु. कीमत का आई कार्ड 200/- रु. में दिया जा रहा है।
मध्यम वर्ग के बहुत सारे परिवार ना जाने कैसे अपने बच्चों को पढ़ा रहे हैं।
जोकि बात बात पर इन प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा वसूली जाने वाली अनाप-शनाप राशि ने उनकी कमर तोड़ कर रख दी है। हर मां बाप का सपना होता है कि वह अपने बच्चों को अच्छी सी अच्छी शिक्षा दे सके। अगर हम अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ाएंगे तो क्या प्राइवेट स्कूल संचालकों द्वारा उन्हें इसी तरह से लूटा जावेगा ?
नियमों का उल्लंघन करने पर प्रशासन के पास इनके खिलाफ कार्यवाही करने के अधिकार तो हैं मगर जाने क्या मजबूरी है जिसके चलते शिकायत करने के बाद भी प्रशासन के अधिकारी इनके खिलाफ कोई कदम नहीं उठाते।

शिकायत की बात भी नहीं होती कार्यवाही, क्या मिलीभगत से सब काम चल रहा है ?

प्राइवेट स्कूल संचालकों के द्वारा सरेआम नियमों का उल्लंघन किया जा रहा है।
इनके खिलाफ आवाज उठाने पर जिला प्रशासन के साथ राजधानी में बैठे आला अधिकारीयों द्वारा नियमों को ताक पर रखकर संचालित होने वाले प्राइवेट स्कूल संचालकों पर कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।
इसको देखकर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि अफसरों व नेताओं की मिलीभगत से इनकी तानाशाही चरम पर है।
गुना शहर में संचालित हाई प्रोफाइल नामी स्कूलों में आला अधिकारियों के बच्चे भी पढ़ने जाते हैं शायद यही कारण है कि प्राइवेट स्कूल संचालकों पर शिकायत के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।

यह प्रशासन की मजबूरी है या फिर जान-बूझकर कार्यवाही ना करने की मनसा इसे क्या माना जाए ?

लिखित में शिकायत दोगे तो होगी कार्यवाही :- जिला शिक्षा अधिकारी सिसोदिया

गुना में जिला शिक्षा अधिकारी का दायित्व निभा रहे श्री चंद्रशेखर सिसोदिया से प्राइवेट स्कूल संचालकों की अनियमितताओं को लेकर कई बार शिकायतें की गई, मगर उनके द्वारा शिकायत के संज्ञान में आने के बाद ही स्कूल संचालक के खिलाफ कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया।
कई बार लिखित में भी शिकायत दर्ज की गई बावजूद इसके कोई कार्यवाही नहीं की गई।
जहां तक जिला शिक्षाअधिकारी शिकायत करने की बात है तो उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता ना ही वह इन शिकायतों पर संज्ञान लेते हुए अपने मनमाफिक अंदाज में संचालित होने वाले इन प्राइवेट स्कूल संचालकों पर कोई कड़ी कार्यवाही करते हैं।
आखिर यह सब क्या हो रहा है किसकी सह से हो रहा है, और यह कब तक चलेगा, क्या इन पर लगाम लगेगी ?
इसको प्रशासन की मजबूरी कहें या कुछ और, जिसके चलते शिकायतों के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।

इनका कहना है :-
स्कूलों में 200/- रुपए में आई कार्ड वितरण किए जाने की शिकायत संज्ञान में आई है, यह गलत है, मैं अभी फोन पर उन्हें फटकार लगाता हूं।
कार्यवाही की बात पूछे जाने पर इनका कहना है कि आप लिखित में शिकायत दे दीजिए मैं कार्यवाही करवा दूंगा। इनकी फाइल बनती है जो कि कलेक्टर साहब को भी बताना पड़ती है।
लिखित में शिकायत करने के बाद भी कार्यवाही ना होने की बात पूछे जाने पर बताया कि मिलने के बाद बात की जाऐगी ।

चंद्रशेखर सिसोदिया
जिला शिक्षा अधिकारी
गुना (म. प्र.)

ट्रेन की चपेट में आने से व्यक्ति की मौत, ट्रैकमेन दी पटरी पर शव पड़े होने की सूचना

गुना ।  शुक्रवार की सुबह कोतवाली थाना क्षेत्र अंतर्गत शहर की नजूल कॉलोनी में रेलवे ट्रैक पर एक व्यक्ति के शव मिलने की सूचना प्राप्त हुई थी जिस पर से कोतवाली थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मृत व्यक्ति की पहचान हेतु जांच प्रारंभ की । मामले में मिली जानकारी के अनुसार आज सुबह रेलवे ट्रैक को ठीक करने निकले ट्रैक मैन द्वारा अज्ञात व्यक्ति के शव को देखा गया शव देखते ही उसने इस बात की सूचना पुलिस को दी । पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव के आसपास छानबीन की जिसमें मृतक का आधार कार्ड और कुछ दस्तावेज पुलिस को प्राप्त हुए पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार मृतक का नाम महेश जगताप उम्र 36 वर्ष निवासी महादेव मंदिर के पास तालुका हवेली पुणे महाराष्ट्र के रूप में सामने आया है । मौके पर मौजूद बीट प्रभारी नरेंद्र गोयल द्वारा बताया गया कि मृतक के परिजनों को इस घटना की सूचना दे दी गई है और मामले की जांच की जा रही है । आशंका जताई जा रही है कि ट्रेन के द्वार पर मंजन करने के दौरान व्यक्ति के गिरने पर वह ट्रेन की चपेट में आ गया और उसकी मृत्यु हो गई बाकी जांच के बाद स्पष्ट हो पाएगा कि व्यक्ति की मौत का कारण क्या रहा ।

ट्रैफिक पुलिस का कारनामा आया सामने अवैध वसूली करते वीडियो हुआ वायरल

गुना । ( शारदा एक्सप्रेस ) सोशल मीडिया पर ट्रैफिक पुलिस द्वारा अवैध वसूली का एक वीडियो जमकर वायरल हो रहा है बताया जा रहा है कि यह वीडियो गुना ट्रैफिक थाने में पदस्थ एएसआई ईश्वर टोप्‍यो का है । जिनके द्वारा बिना रसीद दिए ही चालान की राशि ले ली गई ।
वीडियो से संबंधित मिली जानकारी के अनुसार वीडियो 6 सितंबर की शाम को किसी व्यक्ति द्वारा बनाया गया था जिसमें वाहन को रोकने के पश्चात कागजात पूरे न होने पर उक्त व्यक्ति से चालान के नाम पर अवैध रूप से बिना रसीद दिए 500 रुपऐ लिए गए । यह पूरा मामला पास ही में खड़े व्यक्ति द्वारा बनाए गए वीडियो में कैद हो गया जो कि सोशल मीडिया पर वायरल होने के साथ पुलिस की छवि को लेकर चर्चा का विषय बना हुआ है । आपको बता दें की ट्रैफिक पुलिस का अवैध वसूली को लेकर यह कोई पहला मामला नहीं है आए दिन इस प्रकार की वसूली ट्रैफिक पुलिस द्वारा चालान के नाम पर की जाती रही है ।
अब देखना होगा कि इस मामले पर वरिष्ठ अधिकारी दोषी पुलिसकर्मियों पर क्या कार्यवाही करते हैं ।

जानबूझ कर अनदेखी या फिर अधिकारियों का संरक्षण है प्राप्त, पुरानी गल्ला मंडी का मामला :- जहां मंडी प्रशासन द्वारा फल सब्जी विक्रेताओं से बिना रसीद दिए की रही है अवैध वसूली

गुना। मामला पुरानी ग़ल्ला मंडी है, जहां मंडी प्रशासन के कर्मचारियों द्वारा बिना रसीद दिए फल, सब्जी विक्रेताओं के अबैध  वसूली की जाती है। इस संबंध में मंडी सचिव से पूर्व में भी शिकायत की गई थी, तो उनके द्वारा इस व्यवस्था के सुधार के लिए आश्वासन दिया गया था, मगर कई माह बीतने के बाद भी स्थिति जस की तस बनी हुई है।
फल सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि  मांगे जाने पर भी रसीद नहीं दी जाती है, और विवाद की स्थिति बनती है, कहीं किसी को रसीद दे देते हैं बाकी सब से बिना रसीद के ही टैक्स के रूप में पैसे की वसूली की जा रही है।
 मंडी प्रशासन के कर्मचारियों द्वारा फल सब्जी विक्रेताओं से टैक्स के रूप में पैसे वसूलने का काम बरसों से बदस्तूर जारी है, इस ओर प्रशासन के किसी अधिकारी या ध्यान नहीं है शिकायत करने के बाद भी कोई कार्यवाही नहीं की जाती है।
ऐसे में इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता है कि प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारियों के संरक्षण में यह सब काला पीला चल रहा है।
स्थानीय फल सब्जी विक्रेताओं का कहना है कि मंडी प्रशासन टैक्स ग्रुप में पैसे की वसूली तो करता है मगर यहाँ कि सफाई व्यवस्था पर किसी का कोई ध्यान नहीं है। कचरा चार चार दिन तक नहीं उठाया जाता है, सारे दिन गंदी बदबू के मारे दम घुटने लगता है ।

मंदिर प्रांगण में लगा रहता है कचरे का ढेर 

यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि पुरानी गल्ला मंडी परिसर में श्री बालाजी का मंदिर है, जहां मंदिर परिसर में सारे दिन कचरे के ढेर लगे रहते हैं, जहां 4-4 दिन तक कोई सफाई करने नही आता है। वायरल मौसम का समय चल रहा है जहां मच्छर पनप रहे है। बारिश का मौसम है  ऐसे में बीमारी फैलने का खतरा बना हुआ है।

आखिर किस के संरक्षण में चल रहा है यह गोरखधंधा, जिला शिक्षा विभाग में प्राइवेट स्कूलों को दी जाने वाली मान्यताओं में भारी गड़बड़ी आई सामने

रिपोर्ट : महेश सोनी

गुना । जिला शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पूर्व से ही सुर्खियों में रही है। विभाग की अनियमितताओं को लेकर  समय-समय पर समाचार पत्रों में खरीद खबरें भी प्रकाशित की जाती रही है मगर प्रशासन की अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगती है।
शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर सिसोदिया से पूर्व में प्राइवेट स्कूलों को दी जाने वाली मान्यता को लेकर होने वाली अनियमितताओं के विषय में चर्चा की गई थी तो उन्होंने बताया मुझे इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है, यह मान्यताओं का काम बाबू सुनील जाटव ही देखते हैं, आप इस विषय में उनसे संपर्क कीजिए।

बाबू सुनील जाटव का फोन मिलता है स्विच ऑफ                            बाबू सुनील जाटव को जब भी फोन लगाया गया है, उनका फोन हमेशा स्विच ऑफ बताता है, जिला शिक्षा अधिकारी सिसोदिया इस संबंध में कोई जानकारी देते नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि संबंधित मामले में जानकारी कों देगा ?संयोग वश विगत दिवस बाबू जाटव से मिले और उनसे मोबाइल स्विच ऑफ रखने का कारण पूछा गया तो इसके जवाब में अति व्यस्तता रहने का कारण बताया। शासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी का निर्वहन करने का जिम्मा इन्हें दिया गया है। बावजूद इसके नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट स्कूल संचालकों को मान्यता देने का काम कर रहे हैं।

शिकायत के बाद भी विभाग द्वारा नहीं की जाती है कोई कार्यवाही 

पूर्व में प्राइवेट स्कूल संचालकों को मान्यता देने मैं होने वाली अनियमितताओं के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से जाकर मिले  थे और गुना शहर में नियम विरुद्ध संचालित हो रहे स्कूलों के संबंध में  शिकायत भी की गई थी। इस पर उन्होंने सुनील जाटव जी से संपर्क करने का कहा था। इस संबंध में बाबू जाटव को भी जानकारी संज्ञान में दी गई, मगर आज दिनांक तक उनके द्वारा संबंधित मामले में किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसी के चलते प्राइवेट स्कूल संचालकों मनमर्जी चरम पर है। छात्र छात्राओं की पलकों का जमकर शोषण किया जा रहा है। और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा हुआ है।
सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी भी सामने आई है की प्राइवेट स्कूल संचालकों को मान्यता देने की एवज में मोटी रकम भी वसूली जा रही है। शायद इसी के चलते जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं।
“इन्हें किसी आला अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है या कुछ और है”
यह समझने वाली बात है क्योंकि जिला मुख्यालय पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा इस तरह बेखौफ नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा है।
यह जानबूझकर अनदेखी की जा रही है या इन्हें किसी आला अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है ?
 फिलहाल यह एक जांच का विषय है। अब यह देखना होगा कि जिले के मुखिया इस विषय पर संज्ञान लेते हुए आगे क्या कार्यवाही करते हैं ?