वनकर्मियों ने छोड़ा अवैध लकड़ी परिवहन करता ट्रैक्टर , रेंजर बोले कि नगरपालिका क्षेत्र से आई थी लकड़ी

गुना । गुना वममण्डल में आये दिन हो रही अवैध कटाई , अतिक्रमण से लगातार वनघनत्व कम होता जा रहा है वही दूसरी ओर वनक्षेत्र एवम वनक्षेत्र से लगे ग्रामो से भी लगातार पेड़ो का कटना जारी है जिससे गुना जिले से धीरे धीरे वनों का विनाश होता जा रहा है ।
ताजा खबर गुना वनमंडल की रेंज गुना का है जिसमे वीते दिन मंगलवार को एक ट्रैक्टर ट्रॉली में भरकर लकड़ी का परिवहन किया जा रहा था जिसकी सूचना पर वनकर्मियों ने अवैध तरीके से परिवहन की जा रही लकड़ियों की जांच पड़ताल के लिए ट्रैक्टर ट्रॉली को होटल नवलोक के पास ए बी रोड़ पर रोककर कागजात की जानकारी ली तो ट्रैक्टर ड्रायवर के आना कानी करने पर ट्रैक्टर को साइड लगवा दिया किन्तु थोड़ी देर बाद रेंजर गुना के मौके पर आने के बाद ट्रैक्टर को छोड़ने से मामले में सन्दिग्धता नजर आती है ।
वही जब मामले को लेकर रेंजर गुना से चर्चा की गई तो बताया गया कि मामला में ट्रेक्टर ट्रॉली नगरपालिका क्षेत्र से आया था इसलिए जाने दिया गया वही अगर सूत्रों की माने तो ट्रेक्टर ट्रॉली मावन क्षेत्र से आना बताया गया है अब मामले की जांच वरिष्ठ स्तर से कराने पर ही पता लगेगा कि दाल में कुछ काला है या पूरी दाल ही काली है ।

वनभूमि पर बनी सड़क , कार्यवाही परिनिन्दा तक सीमित, बीटगार्ड ,डिप्टी रेंजर पर कार्यवाही करने से बच रहे आला अफसर

गुना । मध्यप्रदेश में सरकारे बदलती है ट्रांसफर , कार्यवाहियों का दौर चालू होता है किंतु वन विभाग के गुना वनमंडल में पदस्थ वनकर्मीयो पर कार्यवाही करने की जुर्रत कोई भी वनमंडलाधिकारी नही कर पा रहा है वही लगातार वन अपराधों में वृध्दि होती जा रही है अब ये वनकर्मियों की राजनैतिक पकड़ है या अफसरों से सांठगांठ ये तो वरिष्ठ स्तर से जांच होने के बाद ही सामने आ पायेगा ।
ताजा मामला एक RTI से ली गयी जानकारी में सामने आया है जिसमे रेंज गुना की बीट बरोदिया में तत्कालीन उपवनमण्डलधिकारी ने ग्राम पंचायत धानवाड़ी के ग्राम खेरारखेड़ा में सी. सी. खड़ंजा , सीमेंट कॉन्क्रीट 170 मीटर लम्बाई एवम 3.5 मीटर चौड़ाई में 10 से 15 दिन पूर्व का बना पाया था जिसपर से परिक्षेत्र सहायक म्याना एवम बीटगार्ड बरोदिया को नोटिस देकर कारण बताने एवम कार्यवाही करने बाबत लेख किया गया था किंतु इतनी गम्भीर लापरवाही जिसमे भरष्टाचार के आरोप वनकर्मी पर लगे थे का प्रकरण मात्र परिनिन्दा करके बंद कर दिया गया ।
सीसी खरंजा निर्माण होने पर नही की कार्यवाही – बीटगार्ड ओर डिप्टी रेंजर दोनों के द्वारा खरंजा निर्माण को न रोकना न वरिष्ठ को बताना घोर लापरवाही है वही खरंजा निर्माण होने के बाद एवम प्रकरण तत्कालीन उपवनमण्डलधिकारी के संज्ञान में आने के बाद भी आज तक सम्बंधित निर्माण एजेंसी के विरुद्ध वन अपराध दर्ज नही करना वनकर्मियों की मिली भगत की ओर इसारा कर रहा है जिससे अपराधियों के हौसले बुलंद है एवम जगह जगह वनभूमियों पर अवैध कटाई की घटनाओं में वृध्दि हुई है ।

वरिष्ठ अधिकारी की कार्यशैली सन्देह में – ज्ञात हो कि पूर्व में भी वनपाल प्रभारी म्याना सबरेंज की दौरा दैनंदिनी की मांग RTI से की गई थी जिसमे बताया गया कि सम्बंधित वनपाल की दौरा दैनंदिनी कार्यालय में उपलब्ध नही है यहां उल्लेखनीय है कि बिना दौरा दैनंदिनी दिए वनपाल वर्षों से पदस्थ है जिसकी न तो वेतन थामने की कार्यवाही हो सकी है न ही अनुशासनहीनता की कार्यवाही करने की हिमाकत वरिष्ठ अधिकारी कर पा रहे है ।
बीट बरोदिया मे हो रहा अतिक्रमण – बीट बरोदिया के अतिक्रमण की जांच सूक्ष्मता से वन मुख्यालय के द्वरा करबाई जाए तो यहां सेंकडो हेक्टेयर अतिक्रमण देखने को मिलेगा जिसपर वनकर्मी के द्वारा वन अपराध दर्ज नही किया जाकर लापरवाही वरती जा रही है ।
एक तरफ मध्यप्रदेश शासन जल जंगल जमीन बचाने के लिए नई नई योजनाएं लेकर आ रही है वही वन विभाग गुना में बीट बरोदिया में इस प्रकरण में गम्भीर लापरवाही उजागर होने और उसको परिनिन्दा तक सीमित करने से अब वनकर्मियों एवम तत्कालीन वनमंडलाधिकारी की मिलीभगत पर सवालिया निशान लग गया है अब देखना होगा कि मामले में वरिष्ठ स्तर से क्या कार्यवाही होगी या फिर वनभूमि पर अवैध रूप से बना खरंजा यू ही वन अपराधों के होने का साक्षी बना रहेगा ओर वन विभाग चैन की नींद सोता रहेगा ।

लाखो खर्च कर खुदवाई खँतियाँ , अतिक्रमणकारियों ने पूरी , वन विभाग लगा कागजी खाना पूर्ति में, आरटीआई से मिली जानकारी आई सामने

गुना । गुना वन विभाग में आये दिन गम्भीर आर्थिक अनियमितता , अतिक्रमण के बाद गुना वनमंडल की वन चौकी छिपोन का बड़ा मामला एक RTI से मांगी गई जानकरी से उजागर हुआ है जिसकी आँच में अब वनरक्षक से लेकर रेन्जर तक फसते दिखाई दे रहे है ।
मामला गुना दक्षिण रेंज की वन चौकी छिपोन के अंतर्गत बीट छिपोन के कक्ष क्रमांक RF 103 है जिसमे वनभूमि पर से अतिक्रमण रोकने के लिए लाखों का बजट खर्च कर दो हजार कन्टूर ट्रेंच वन विभाग के द्वारा पूर्व में खुदवाई गयी थी किन्तु दिनांक 23.12.2018 को तत्कालीन प.स. बजरंगगढ़ जितेंद्र सिंह ने जंगल गस्त के दौरान बीट में कन्टूर ट्रेंच पुरी हुई पाई थी जिसपर बीटगार्ड के द्वारा वन अपराध 4779/13 दिनांक 23.12.2018 पंजीबद्ध किया गया था किंतु मामले में RTI से जो जानकरी निकलकर सामने आई है उसके अनुसार मामले में बीटगार्ड की बड़ी लापरवाही सामने आ रही किन्तु आज तक वनरक्षक पर कार्यवाही न होना चर्चा का विषय बना हुआ है ।

  1. बीटगार्ड को नही थी ट्रेंच पूरने की जानकरी – जैंसा की पँचनामा में लिखा गया है कि जंगल गस्त के दौरान देखा कि ट्रेंच पूरकर खेती की जा रही है वही वन अपराध रजिस्टर में अपराध 10 से 15 दिन पूर्व का घटित होने बताया है क्या बीट प्रभारी ने 15 दिनों तक जंगल गस्त नही की ?
    क्या ट्रेंच पूरने का कारनामा अतिक्रमणकारी के द्वारा बीटगार्ड से मिलकर किया गया ? ऐसे कई बिंदु है जो वनमण्डलाधिकारी के द्वारा निष्पक्ष जांच करने पर सामने आ सकते है ।
  2. शासकीय कार्य मे बाधा डालने की सूचना वरिष्ठ अधिकारियों को न देना – मामले में पंचनामे से चोंकाने बाले तथ्य सामने आ रहे है जिनमे वन अमले के द्वारा पंचनामे में लिखा गया है कि ट्रेंच पूरते हुए वन अमले के द्वारा बार बार समझाइश देने के बाद भी आरोपी नही माना व वाद विवाद किया अभद्र भाषा का प्रयोग किया किन्तु POR बुक में ऐसा कुछ उल्लेख नही वही अपराध भी 10 से 15 दिन पूर्व का होना बताया है जिससे पंचनामे की बैधता पर सवालिया निशान लग गया है । वही अगर सच मे आरोपी के द्वारा वाद विवाद किया गया तो क्या इसकी सूचना वरिष्ठ अधिकारी को दी गयी ?
    क्या इसकी सूचना पुलिश थाना में दी गयी ?

लापरवाही बरतने पर वनरक्षक पर कोई कार्यवाही नही – लाखों का बजट खर्च करने के बाद भी बनभूमि पर अतिक्रमण कर लेने के बाद भी वरिष्ठ अधिकारियों के द्वारा लापरवाही करने पर बीटगार्ड पर कार्यवाही न करना भी समझ से परे है ?

अतिक्रमित बनभूमि पर हो रही है खेती – लाखों का बजट खर्च करके ट्रेंच खोदने के बाद भी अभी भी बनभूमि पर खेती की जा रही है वही लाखों रुपये शासकीय धन की बसूली कब और कैसे होगी इस पर भी वन विभाग ने चुप्पी साध रखी है वही मामले में वन विभाग बेदखल की कार्यवाही प्रचलित होना बता रहा है तो विषय यही ह की आखिर कब जागेगा वन विभाग और कब होगी बेदखली की कार्यवाही ?

वही मामले में आरोपी के द्वारा वन विभाग को लिखित में कन्टूर ट्रेंच पूरने पर होने बाले जुर्माने को भरने की सहमति 2019 में दे दी गयी थी किन्तु आज तक न तो जुर्माने की राशि वन विभाग बसूल सका न अतिक्रमणकारी के कब्जे से बनभूमि को अतिक्रमण मुक्त करवा सका है अब देखना होगा कि लापरवाही बरतने वाले बीटगार्ड पर भी कोई कार्यवाही होती है या यह मामला भी वन विभाग की फाइलों में दफन होकर रह जायेगा ।

अधिकारियों की दया दृष्टि से वन विभाग में कई वर्षों से जमे हैं वीटों पर वन कर्मचारी, मुख्यालय के आदेशों पर नहीं किया जा रहा अमल

गुना । बमोरी विधानसभा में उपचुनाव के मद्देनजर जिला प्रशासन एवम अन्य विभागों में एक ही जगह वर्षो से जमे अधिकारियों , कर्मचारियों का स्थानांतरण कर प्रशासनिक सर्जरी समय समय पर होती रही है किंतु  वनमंडल गुना इन सब से अछूता और चर्चाओं का विषय बना हुआ है । परिणामस्वरूप सेंकडो वनकर्मी वर्षो से एक ही बीट पर सेवाएं देते आ रहे है । वनमंडल अंतर्गत आये दिन अनियमितता, अवैध कटाई , अवैध उत्खनन के कारनामे लगातार सामने आते रहे है परिणाम स्वरूप वन मुख्यालय से वनमंडलाधिकारी , उपवनमण्डलधिकारी , रेन्जर के स्थानांतरण तो वन मुख्यालय से कर सर्जरी होती रही  है किंतु इन सब के बाद भी वनमंडल में अवैध कटाई , उत्खनन रुकने का नाम नही ले रहा है अभी हाल ही में बमोरी में सोनखरा , पाटन में बोरिंग होना किसी से छुपा नही है । परंतु इस मामले में क्या कुछ कार्रवाई होगी यह कहा नहीं जा सकता ।

ताजा मामला वनमंडल की रेंज गुना उत्तर में वनरक्षकों की पद्स्थिति का आया है यहां पदस्थ वनरक्षकों की राजनैतिक पकड़ एवं आला अधिकारियों की दया दृष्टि के चलते वर्षों से एक ही बीटों पर जमे हुए है  गुना रेन्ज के अंतर्गत बीटगार्ड भदौरा 2013 से लगातार बीट भदौरा पर पदस्थ है तब से लेकर अब तक लगातार एक ही बीट पर सेवाएं देना वनमंडल में चर्चा का विषय है  वही इसी रेंज के तिनस्याई , पटना , भुराखेड़ी , उमरी दिनोला पर पदस्थ वनरक्षक भी सालों से एक ही बीटों पर जमे हुए है एवम समय समय पर स्थानन्तरण नीति के आने के बाद भी एक ही बीट पर वर्षो से पद्स्थिति कही न कही वन विभाग के अधिकारियों से मिलीभगत की ओर इशारा कर रही है वही दूसरी तरफ वन विभाग में कुछ वनरक्षक से लेकर वनपाल है जिनका एक वर्ष में 2 बार तक डयूटी के नाम पर स्थानन्तरण कर दिया गया है ।

बढ़ रही है अवैध कटाई की घटनाएं – यहां दिलचस्प बात यह सामने आ रही है कि लगातार वनों में अवैध कटाई , अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ने के बाद भी वनरक्षकों को इतने लंबे समय एक ही बीट पर रखकर कार्य कराया जा रहा है यदि वर्षो से गुना में जमे वनरक्षकों को अन्य रेंजों में भेजकर सर्जरी की जाए तो अवैध कटाई ,अतिक्रमण की घटनाओं में कमी देखने को मिल सकती है । वही एक ही समय पर वर्षो से जमे होने के कारण वनरक्षकों के बीट क्षेत्र में अपराधियों से भी अच्छे सम्बन्ध हो गए है जिससे इनकी मिलीभगत से इंकार नही किया जा सकता ।

कर सकते है उपचुनाव प्रभावित – लगातार एक ही पद पर एक ही बीट पर पदस्थ रहने के कारण वनरक्षकों के द्वारा उपचुनाव को प्रभावित करने की सम्भावनाओ को नकारा नही जा सकता ।अब देखना होगा कि मामला सुर्खियों में आने के बाद वनमंडल गुना अंतर्गत वर्षो से एक ही बीटों पर जमे वनकर्मियों का स्थानांतरण कर वन विभाग में बड़ी सर्जरी होती ह या फिर वन मुख्यालय के आदेश भी मात्र कागजो में दफन होकर रह जाएंगे ?


वन मुख्यालय के है स्थानन्तरण के आदेश – ज्ञात हो कि वन मुख्यालय के द्वारा भी 3 वर्ष से अधिक एक ही बीट पर पदस्थ बीटगार्ड के स्थानन्तरण करने के आदेश दिए गए है किंतु लगता है वन मुख्यालय के आदेश कागजो की खाना पूर्ति बनकर रह गए है ।अब देखना होगा कि मलाईदार बीटों पर वर्षो से जमे वनरक्षकों की उपचुनाव से पहले सर्जरी होती ह या एक बार फिर अपनी राजनैतिक पकड़ के चलते ये सभी नियम कानूनों को धता बताकर एक ही बीट पर सेवाएं देते रहेंगे ।वही जब इस मामले में वनमंडलाधिकारी गुना से सम्पर्क करने की कोशिश की गई तो उनके द्वारा फ़ोन नही उठाया गया ।

म्याना थाने में पदस्थ उप निरीक्षक मांग रहा था 45 हजार, शोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस कप्तान ने दिखाया लाइन का रास्ता

गुना । पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह गुना जिले की पुलिस की छवि सुधारने का प्रयास कर रहे हैं परंतु जिले के विभिन्न थानों में पदस्थ कुछेक पुलिसकर्मी उनके प्रयास को ही चुनौती देने में लगे हुए हैं । हालांकि पुलिस अधीक्षक की जानकारी में अगर किसी पुलिसकर्मी की शिकायत या उसके कृत्य से संबंधित वीडियो वायरल आता है तो वह स्वयं संज्ञान लेकर उसे दंडित करने से नहीं चूकते ।
जब से पुलिस अधीक्षक ने गुना जिले का प्रभार संभाला है तब से एक कई पुलिसकर्मी उनके कृत्य के लिए उनके द्वारा दंडित किए जा चुके हैं । हाल ही में एक मामला म्याना थाना पुलिस में पदस्थ उप निरीक्षक कमलेश गौड़ का सामने आया । जिस की जानकारी लगते ही पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने उसे निलंबित कर पुलिस लाइन के द्वार दिखा दिए । उल्लेखनीय है कि यह उप निरीक्षक कैंट थाना सहित जिले के कई थानों में पदस्थ रहे और निर्भीकता से मनमानी करने पर आमदा रहते थे । म्याना थाने में हुई इस घटना पुलिस अधीक्षक ने यह पाया कि उप निरीक्षक द्वारा ₹45000 की अवैध मांग की जा रही थी । जिसे पुलिस अधीक्षक ने भ्रष्ट आचरण की श्रेणी का मान कर उपनिरीक्षक को दंडित किया है । अगर पुलिस अधीक्षक उप निरीक्षक के केंट थाने सहित अन्य थानों में पदस्थ के दौरान इनके द्वारा की गई कारगुजारीओ की जांच कराएं तो और भी रोचक तथ्य सामने आ सकते हैं । यह भी खबर है कि उक्त निरीक्षक ने किसी गाड़ी को छोड़ने के लिए म्याना थाने में न्यायालय का आदेश होने के उपरांत भी उसका पालन ना कर अपने भ्रष्ट आचरण के चलते रुपए 45000 की मांग दबंगता से करते रहे ।इसका वीडियो वायरल हुआ है ।जिस पर पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह ने सख्त रवैया अपनाते हुए दिनांक 16 सितंबर 2020 को उपनिरीक्षक कमलेश गौड़ को निलंबित कर दिया है ।

सबरेंज कैम्पस से की जा रही थी वनोपज की चोरी , ट्रैक्टर सहित 3 पकड़ाए, प्रकरण पंजीवद्ध

गुना । गुना वनमंडल में एक के बाद एक गम्भीर मामले सामने आ रहे है अभी हाल ही में एक साहसी वनरक्षक के द्वारा वन विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम में खुलेआम वन विभाग में मिलीभगत से जंगलों की कटाई को लेकर रेंज मकसूदनगढ़ के वन अमले पर संलिप्तता के आरोप लगाए थे जिसके बाद से बड़ी कार्यवाही की आशा वनमंडलाधिकारी से की जा रही थी किन्तु जंगल मे अतिक्रमण कराने , अवैध कटाई करवाने में संलिप्त वनकर्मियों व अधिकारियों पर कोई कार्यवाही न होने से अब आरोपियों के हौसले इतने बुलंद हो चुके है कि रेंज कैंपस में से वनोपज को रात के अंधेरे में चोरी छुपी ट्रैक्टर ट्रॉली की सहायता से खुलेआम वनोपज की चोरी करने का प्रयास किया जा रहा था ।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार दिनांक 06.09.2020 को रात्रि में जामनेर रेंज कैम्पस में रखी हुई वनोपज को ट्रैक्टर ट्रॉली से परिवहन कर चोरी करने की सूचना एक वनकर्मी को मिली सूचना पर वनरक्षक द्वारा परिक्षेत्राधिकारी को सूचित कर वनबल की मांग की गई, किन्तु स्टाफ न मिलने की स्थिती में वनरक्षक द्वारा डायल 100 से मदद मांगी गई , डायल 100 से पुलिस सहायता आने पर वनरक्षक द्वारा मौके( सबरेंज कैम्पस ) पर पहुंच कर देखा गया तो वहां एक ट्रैक्टर ट्रॉली में वनोपज को लोड किया जा रहा था किंतु वनरक्षक के मौके पर पहुंचते ही वहां उपस्थित आरोपियों के द्वारा वनोपज को ट्रॉली से नीचे फिकवा दिया गया और ट्रैक्टर ट्राली को भगा ले जाने का प्रयास किया, जिसपर वनरक्षक के द्वारा ट्रैक्टर ट्रॉली को रोक कर, मौके से 3 आरोपियों को पकड़ लिया गया जबकि एक अन्य भागने में सफल रहा ।
विश्वनीय सूत्रों से ज्ञात हुआ कार्यवाही के दौरान मौके से फरार होने बाला आरोपी वन विभाग से सम्बंधित ही बताया जा रहा है जिसके बारे में पूर्व में भी वरिष्ठ अधिकारियों को अवगत कराया जा चुका है। सूत्रों ने यह भी बताया कि उक्त वन विभाग से सम्बंधित व्यक्ति जिले में इस प्रकार की गतिविधियों को कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से करवाता आ रहा है ।

कार्यवाही के बाद वनरक्षक को मिल रही है धमकियां – उक्त कार्यवाही के बाद वही इस पूरे मामले को लेकर वनरक्षक को जान से मारने की धमकियां दी जा रही है हालांकि उक्त वनरक्षक द्वारा इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी वन विभाग के वरिस्ठ अधिकारियों की जानकारी में दे दी गयी है , जान से मारने की धमकियों को लेकर उक्त वनकर्मी ने इसकी शिकायत सम्बंधित पुलिस थाना एवं पुलिस अधीक्षक कार्यालय, गुना में आवेदन देकर की है ।

इस पूरे मामले के सम्बन्ध में मकसूदनगढ़ रेन्जर से चर्चा की गई तो उन्होंने बताया कि दिनांक 06 सितम्बर को रात्रि में जामनेर से लकड़ी चोरी के मामले में मौके पर से तीन लोगों को पकड़ा गया है और ट्रैक्टर ट्रॉली की जप्ती करके प्रकरण पांजिवद्ध कर जांच में लिया है जिसकी विवेचना जारी है ।

आखिर कब थमेगा वनभूमि को लेकर खूनी संघर्ष का खेल ? जंगल कटाई व अतिक्रमणकारियों पर क्यों नहीं कार्यवाही

गुना । बमोरी विधानसभा के बमोरी व फ़तेहगढ़ वनपरिक्षेत्रों में आए दिन खूनी संघर्ष देखने को मिल रहे हे । कंही जंगल कटाई को लेकर तो कंही अतिक्रमण को लेकर लोगों में लड़ाई झगड़े आम बात हो गई हे । खूनी संघर्ष में तब्दील वनो की अवेध कटाई व अतिक्रमण पर वन विभाग ने आँखे बंद कर ली हे । नतीजन अब लोगों में अतिक्रमण व वन कटाई को लेकर होड़ मची हुई हे । लाखों पेड़ों की कटाई पिछले एक महीने में वन मफ़ियाओ द्वारा कर दी गई हे । पहले कटाई रात के अंधेरे में की जाती थी पर अब दिन के उजाले में ही कटाई ओर अतिक्रमण धड़ल्ले से बिना किसी रोक टोक के जारी है ।

वनभूमि को लेकर खूनी संघर्ष
फ़तेहगढ़ वनपरिक्षेत्र अंतर्गत बिलखेड़ा , डोबरा , यंहा दो समुदाय आपस में भीड़ गए ओर दोनो पक्षों के लोग घायल हो गए थे ।बिलखेड़ा में बंजारा समुदाय के दो पक्षों में जमकर लाठी पत्थर चले जिसमें महिला पुरुष घायल हुए ।पनहेटी में बंजारा समुदाय व मीना समुदाय में जंगल कटाई को लेकर खूनी संघर्ष हुआ । ढीमरपूरा में भी जमकर हंगामा हुआ । रबड़ी में सहरिया ओर भीलों में खूनी संघर्ष पत्थर लाठी यंहा तक एक महिला के पैर में तीर लगने की बात आइ थी । वंहि बमोरी के खेरोदा में मार पिट का मामला सामने आया था । पाटन में तो फ़ोरेस्ट अधिकारियों को विश्राम ग्रह में ताला लगाकर अंदर छुपाना पड़ा था ।मूँधोल में भी वनकटाई को लेकर जमकर हंगामा हुआ था । वंहि कल की ताज़ा घटना बमोरी में हुई । यहाँ भील ओर किरार समुदाय जंगल कटाई को लेकर भीड़ गए ओर दोनो पक्षों के लोग घायल हो गए । ग्राम चाकरी के भीलों ने तो ढीमरपूरा के सहरिया आदिवासियों को बंधक तक बना लिया था । इन सब घटनाओं के बावजूद ना तो वन विभाग हरकत में आता दिखाई दिया ओर ना ज़िला प्रशासन की ओर से ठोस कदम उठाया गया ।

आगे ओर भी ज़्यादा बन सकती हे भयावह स्थिति

अगर वनो की कटाई व अतिक्रमण पर जल्द कोई कदम नहि उठाया गया तो स्थिति ओर भी घंभीर बन सकती हे । जिसका खमयजा कई निर्दोषो को भुगतना पड़ सकता हे । वन भूमिपर अतिक्रमण कभी बन सकता हे काल जिसकी गस्त में कितने लोग समाय बता नहि सकते । लोगों में रोज अतिक्रमण को लेकर टकराव की स्थिति उत्पन्न हो रही जो कभी भी भयावह स्थिति में बदल सकती हे । स्थिति भयवाह बने इससे पहले ज़िला प्रशासन को ठोस कदम उठाने की जरुरत हे , जो अब तक धरातल पर नजर नहि आ रहा । ओर इसी वजह से अतिक्रमनकारियों के होशले बुलंदी पर हे ।

फतेहगढ़ पुलिस ने कलोरा चोरी उजागर कर लूटी वाहवाही, उपज मंडी फतेहगढ़ से पांच लाख की चोरी का सुराग तक नहीं

गुना /फतेहगढ़ । जिले में अक्सर सुर्खियों में रहने वाला फतेहगढ़ थाना चोरियों और अन्य अपराधिक गतिविधियों के मामले में भी गुना पुलिस का सिरमोर माना जाता है हाल ही में थाना क्षेत्र में बहुचर्चित कलोरा डकैती मामले में गुना पुलिस को डकैती उजागर करने की सफलता हासिल हुई थी जिसमें फतेहगढ़ पुलिस भी खासी वाहवाही लूटने में मशगूल नजर आ रही थी वही कलोरा डकैती के पूर्व फतेहगढ़ कस्बे की कृषि उपज मंडी से एक पाँच लाख कि नगद रकम से भरा बैग को अज्ञात चोरों द्वारा चोरी को अंजाम दिया गया था जिसे थाना पुलिस ने ठंडे बस्ते में डाल रखा है एक महा बीत जाने के बाद भी पुलिस को बेग चोरी का सुराग तक नहीं लगा ऐसी और भी कई अन्य अपराधिक मामले हैं जिनमें पुलिस तफ्तीश कर जांच का थैला अपनी अलमारी में ठंडा होने के लिए रख देती है
मिडिया के ऊपर लगातार शिकंजा कसने की कोशिश
वही अब मीडिया के पुलिस सूत्रों के हवाले से मिली जानकारी के अनुसार जो स्थानीय पत्रकार लगातार फतेहगढ़ थाने के गोलमाल मामलों को उजागर कर रहे हैं उनकि भी पुलिस अब अगली पिछली सब कहानी टटोल रही है साथ ही जनता के बीच पुलिस द्वारा स्थानीय पत्रकारों की एक दागदार अलग ही छवि पेश कर रही है क्योंकि मलाईदार थाने के नाम से जाना जाने वाला फतेहगढ़ थाने के मलाईदार कारनामों को लगातार उजागर करने में फतेहगढ़ के स्थानीय पत्रकारों की अहम भूमिका रही है सूत्र बताते हैं कि पुलिस अब जनता और पत्रकारों के बीच टकराव कराने के मूड में है क्योंकि फतेहगढ़ के स्थानीय पत्रकार अक्सर मलाई और पुलिस के बीच में रोड़ा बनकर नजर आते हैं यही कारण है कि अब पुलिस को भी ऐसे ऐसे हथकंडे का इस्तेमाल करना पड़ रहा है ।

रिश्वतखोरी में एएसआई लाइन अटैच
हाल ही में फतेहगढ़ थाने का एक एएसआई लाइन हाजिर हुए हैं जिन पर 60 हजार की रिश्वत का आरोप लगा था जानकारी के मुताबिक फतेहगढ़ थाने में पदस्थ एएसआई रामाकांत पचोरी द्वारा सेंनवोट चौराहे से खाली लोडिंग वाहन को जब्त कर थाने में लाया गया था और चालक से पुलिसिया कानून के नियम बता कर रिश्वत की मांग पुलिस द्वारा परोसी गई थी जब मामला मीडिया में उछला तो नवागत पुलिस अधीक्षक राजेश कुमार सिंह जो काफी तेज तर्रार और स्वच्छ छवि के माने जाते हैं तुरंत मामले की पड़ताल कर एएसआई रमाकांत पचोरी को लाइन हाजिर कर दिया एवं सूत्रों के हवाले से मिली खबर के अनुसार पदस्थ थाना प्रभारी फतेहगढ़ के ऊपर भी रिश्वत कांड में जांच की तलवार लटक रही है ।
पिछली चोरियां गोलमाल
फतेहगढ़ पुलिस कलोरा मामले में सफलता के बाद पिछली सभी चोरियों को भूल गई जबकि पूर्व में भी फतेहगढ़ थाना क्षेत्र में लाखों की बड़ी चोरियों के मामले दर्ज हैं जिनमें पुलिस की कार्रवाई अब तक शुन्य रही थाना क्षेत्र में तीन वर्ष के अंतराल में कपासी डकैती जिसमें काफी गंभीर मारपीट की गई थी फतेहगढ़ कस्बे में पठार कॉलोनी में किसान दंपत्ति को बंधक बनाकर लाखों की डकैती कस्बे में किला मोहल्ला में शिक्षक इंजीनियर के घर से बाइक सहित लाखों की चोरी कृषि व्यापारी के सूने मकान से लाखों की कीमत में सोने चांदी के आभूषण चोरी उसी रात एक शिक्षक के घर से बाइक चोरी जिसमें फरियादी शिक्षक देव सिंह भिलाला अपनी बाइक चोरी की फाइनल रिपोर्ट बीमा कंपनी में लगाने के लिए फतेहगढ़ थाने के कई चक्कर लगा चुके हैं जिसे पुलिस अपनी नाकामी छुपाने के कारण देने में हीचकीछा रही है हाल ही में थाना क्षेत्र के बनियानी से बाइक चोरी फतेहगढ़ कस्बे के चौराहे पर रखी दो और बाइक का भी नहीं अब तक सुराग इन सबके साथ सीलावटी ढीमरपुरा जेतपुरा बरोदिया अजरोंडा भिंडरा कोहन जैसे कई गांवों में चोरी डकैती के कई मामले लंबित हैं ।

कटते जंगल बने है आदिवासियों के लिए चिंता का विषय , वनों को बचाने के लिए वनसंरक्षक को दिया ज्ञापन, क्या होगी कोई कार्यवाही …?

गुना। गुना वनमंडल की रेंज बमोरी में आये दिन हो रही अवैध कटाई, अतिक्रमण के बाद भी वन विभाग के द्वारा कोई कार्यवाही न किये जाने से अब ग्रामीणों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है ताजा माममें में बमोरी जनपद के बनियानी गांव के एक सैकड़ा से अधिक ग्रामीणों ने वन विभाग गुना के दफ्तर में वनसंरक्षक को ज्ञापन देकर कहा कि कालीभोट और महुआखेड़ा के भीलों ने वनभूमि पर कब्जा कर पेड़ों की कटाई कर रहे है, जब उनको ग्रामीण रोकने को जाते है, तो यह भील समुदाय के दो सैकड़ा से अधिक लोग मारपीट करने पर उतारू हो जाते है। वन भूमि पर दो गांव के सैकड़ों लोगों ने कब्जा कर फसल बो दी है। इस दौरान ग्रामीणों ने एक पंचनामा भी वनसंरक्षक को सौंपा है। बनियानी गांव के ग्रामीणों ने शुक्रवार को अफसरों को पंचनामा देकर कहा कि कालीभोट और छतरपुरा के 150 ग्रामीणों ने शराब पीकर हमला कर दिया।इसके पीछे की वजह यह थी कि बनियानी गांव के लोगो ने भील समुदाय के लोगों को वनभूमि पर अतिक्रमण करने से रोका था। वही ग्रामीण अमरलाल ने कहा कि अगर वनो की अवैध कटाई ओर अतिक्रमण को नही रोका गया तो हम ग्रामीण संयुक्त रूप से उपचुनाव का बहिष्कार कर देंगे ।
जंगल को न बचाकर मुर्गे ओर दारू की पार्टी कर रहे वन अफसर – बमोरी रेन्ज में पिछले माह से लगातार वन भूमि पर कब्जे , कटाई के मामले सामने आने एवम रेन्जर के द्वारा उदासीनता बरतने पर अब ग्रामीण वन अमले पर जंगल को न बचाकर मुर्गे ओर दारू की पार्टी करने का आरोप लगाने लगे है ।
रेन्ज अफसर ने दिया बेतुका बयान – वही जंगल मे हो रही कटाई रुकवाने व अपराधियों पर कटाई करने को लेकर कड़ी कार्यवाही के लिए जब ग्रामीण रेन्जर के पास पहुंचे तो रेन्जर ने ग्रामीणों से सरपंच के पास जाकर जंगल कटाई रुकवानी की बात कही, ऐसा ग्रामीणों का कहना है वही ग्रामीणों ने पैसे मांगने के भी आरोप रेन्जर पर लगाये ।
कभी हो हो सकती है बड़ी घटनाएं – जंगल में अन्धाधुंग कटाई होने के चलते अब ग्रामीणों में आपसी सँघर्ष की स्थिति बनती नजर आ रही है अगर जल्द ही कोई बड़ी कार्यवाही प्रशासन के द्वारा नही की गई तो सम्भव है ग्रामीणों में आपसी वाद विवाद कहि बढ़कर उग्र न हो जाये ।अब देखना होगा कि वनसंरक्षक के द्वारा मामले पर संज्ञान लेकर बड़ी कार्यवाही संलिप्त वनकर्मियों ओर आरोपियों पर की जाती है या पूर्व की भांति इसे भी ठंडे बस्ते में डाल कर जंगल को काटने की मौन स्वकृति अपराधियों को दी जाती रहेगी ।

स्कूल के मनमाने रवैये के खिलाफ लामबंद हुऐ अभिभावक

गुना । शहर का प्रसिद्ध स्कूल क्राइस्ट सीनियर सेकेंडरी स्कूल जो कि ऑनलाइन पढ़ाई करा रहे हैं साथ ही उन्होंने एक मैसेज के माध्यम से सभी अभिभावकों को बताया कि सितंबर माह के आखिरी हफ्ते में बच्चों का ऑनलाइन टेस्ट लिया जाएगा इस बात से नाराज अभिभावक आज इकट्ठा होकर स्कूल परिसर पहुंचे जहां काफी देर जद्दोजहद करने के बाद भी प्रिंसिपल की हठधर्मिता देखने को मिली अभिभावकों का आरोप है कि काफी देर से स्कूल परिसर में खड़े हैं और प्रिंसिपल को बाहर बात करने के लिए बुला रहे हैं l लेकिन प्रिंसिपल ने बाहर आने से साफ मना कर दिया अभिभावकों का आरोप है कि पहले तो बच्चों को पूरी तरह से अंग्रेजी में ऑनलाइन क्लासेस लेने के लिए मजबूर किया जा रहा है जबकि छोटे बच्चे इतनी ज्यादा अंग्रेजी एकदम नहीं समझ सकते वही दूसरा यह भी आरोप लगाया की बच्चों की ड्रेस है उसको पहनने के बाद बच्चों स्किन डिसीसिस हो रहे हैं साथ ही साथ यह भी आरोप लगाया कि कोरोना के चलते सभी अभिभावक आर्थिक तंगी के दौर से गुजर रहे हैं और ऐसे में स्कूल प्रशासन की तरफ से फीस जमा करने के लिए दबाव बनाया जा रहा है जिसके चलते परीक्षाओं का आयोजन ऑनलाइन किया जा रहा है अभिभावकों ने एक सुर में जिला प्रशासन से मांग की कि यदि स्कूल की मान्यता रद्द नहीं की जाती और अभिभावकों के साथ न्याय नहीं होता तो वह हिंसक प्रदर्शन को छोड़कर हर तरह का प्रदर्शन करने के लिए बाध्य होंगे जिसका जिम्मेदार जिला प्रशासन और स्थानीय क्राइस्ट स्कूल होगा आपको बता दें कि अभिभावक तकरीबन 2 घंटे बाहर खड़े रहे लेकिन बाहर आने जहमत तक नहीं उठाई वही अपनी एक शिक्षिका के माध्यम से खबर भेजी थी वह अभी बात नहीं कर पाएंगे अब देखने लायक होगा कि जिला प्रशासन इस मामले पर क्या ठोस कार्यवाही कर आभिभावकों को न्याय दिलोएगा ।