वन विभाग हुआ शर्मसार, वन क्षेत्र में तार फेंसिंग चोरी करते पकड़ाया वनकर्मी, मामले की जांच में लगे आला अधिकारी

गुना । गुना वनमंडल में भ्रष्टाचार की परत एक-एक करके लगातार खुलती जा रही है अभी हाल ही में सर्वे के नाम पर पैसे लेते एक वन कर्मी धराया था उसके बाद आज का मामला सामने आने के बाद वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार गुना बन मंडल की रेंज गुना की बीट बजरंगगढ़ में प्लांटेशन में लगे तार फेंसिंग की चोरी की सूचना बीटगार्ड को मिली थी जिस पर बन अमले ने दबिश दी तो मौके पर तार फेंसिंग चोरी करते हुए वनकर्मी और दो अन्य साथी पकड़ाये अपने साथी वन कर्मियों को ऐसा कृत्य करते सभी भौंचक्के रह गए वही मोके से तारफेन्सिंग भी बरामद हुई है।
वन विभाग हुआ शर्मशार – वनों के रक्षक के द्वारा अपनी रेंज में इस तरह की घटना सामने आने के बाद वन विभाग की किरकिरी हो रही है वही अब आला अधिकारी भी मामले को जांच में लग गए है जबकि चोरी के मामले में सर्वप्रथम पुलिस थाने में सूचना करना था किंतु अभी तक वन अमले के द्वारा मामले की जांच जारी है
इस मामले में रेंजर विवेक चौधरी से बात की गई तो बताया कि कल रात्रि का मामला है लोगों के बयान लेने के बाद क्या स्थिती परिस्थितियों में यह घटना हुई उसके बाद आगे की कार्यवाही की जाएगी ।

सर्वे के नाम पर हो रही शिकायते, वनभूमी कब्जा छीनने की बात पर भील समुदाय के व्यक्ति ने C.M हेल्पलाइन पर की शिकायत दर्ज

गुना । गुना वनमंडल में हाल ही में वनाधिकार के नाम पर पैसे मांगते हुए एक वनकर्मी का वीडियो वायरल हुआ था जिसके बाद गुना कलेक्टर के संज्ञान में मामला आने के बाद बनमण्डलधिकारी गुना द्वारा उक्त वनकर्मी को निलंबित करते हुए जांच टीम गठित की थी जिसकी जांच जारी है वही इस मामले के ठंडे होने से पहले एक ओर वनकर्मी पर अतिक्रमण के आरोप नैना भील निवासी गोकुल सिंह चक ने लगाए है मामले में नैना भील के द्वारा बताया गया कि वीटगार्ड इमरान के द्वारा मुझ अनुसूचित जनजाति के व्यक्ति के कब्जे की वनभूमि को छीनकर सामान्य जाति वर्ग के व्यक्ति को मेरी जमीन पर गलत तरीके से पट्टा दे दिया  है जबकि मेरा यहां वर्षो पुराना कब्जा है मेरी जमीन का पट्टा अन्य किसी को दे देने से मेरे पास भरी गर्मी में रहने के लिए घर नही बचा है मेरे द्वारा विरोध करने पर इमरान बीटगार्ड मेरे घर का सामान भरकर ले गया है इस बाबत शिकायत C. M हेल्पलाईन में कई गयी है मामले की जानकारी के लिए रेंजर विवेक चौधरी को फोन लगाया गया किन्तु फ़ोन नेटवर्क से बाहर होने के बात नही हो पाई । वही मामले में बीटगार्ड इमरान से बात की गई तो बताया गया कि उक्त व्यक्ति का जंगल की जमीन पर अवैध कब्जा था जिसके कोई दस्तावेज न होने के कारण कानूनी तरीके से वनभूमि से बर्ष 2018 में बेदखली की कार्यवाही की गई है आरोप बेबुनियाद है ।

सर्वे के नाम पर चल रहा गोरखधंधा – वही खबर है कि गुना वनमंडल में अधिकतर जगह लगातार बीटगार्ड के द्वारा अपने चहेते व पैसे वाले  लोगों का सर्वे किया जा रहा ऐसी शिकायते सामने आ रही है  अभी हाल ही में ख़ैरिखता में वनकर्मी का पैसे लेते वीडियो वायरल होने से हड़कम्प मच गया था वही लगातार सर्वे के नाम पर हो रही शिकायते कहि न कही सर्वे के नाम पर हो रहे गोरखधंधे की ओर इशारा करती नजर आ रही है ।

मध्य प्रदेश सरकार का पुलिस कर्मचारियों को पदनाम या कर्मचारियों के साथ छलावा

गुना ।  मध्यप्रदेश में लंबे इंतजार के बाद शिवराज सरकार ने पुलिस कर्मियों के प्रोमोशन के लिए पुलिस रेगुलेशन में संशोधन किया था किंतु शिवराज सरकार द्वारा पदोन्नती के लिए बनाए गए नियमो पर अब विवाद शुरू हो गया है । यहां उल्लेखनीय है कि मध्यप्रदेश में मई 2016 से पद्दोन्नति में आरक्षण के नियम को लेकर पद्दोन्नति पर न्यायालय द्वारा रोक लगा दी गयी थी जिससे प्रदेश के लाखों कर्मचारियो की पदोन्नति रुक गई थी इस मामले में शिवराज सरकार ने नए नियम के तहत पुलिस कर्मियों को पदनाम देने के लिए बीच का रास्ता अपनाया था । विगत 6 वर्षों से मध्यप्रदेश में पदोन्नति का मामला सर्वोच्च न्यायालय में लंबित है जिससे मध्यप्रदेश सरकार के हजारों कर्मचारी बिना प्रोमोशन के रिटायर हो रहे है वही मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस विभाग के कर्मचारियों को पदोन्नति के स्थान पर पदनाम देने के लिए पुलिस रेगुलेशन में संशोधन कर प्रक्रिया अपनाई ओर मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा पदनाम को लेकर  मीडिया पर और समाचार चैनलों में बड़ी-बड़ी डींगे हाकी गई जिससे पुलिसकर्मियों में पदनाम को लेकर बड़ी आशा लगी हुई थी लेकिन मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा 5 सालों के बाद स्पेशल ब्रांच में पूरे प्रदेश में मात्र 5 लोगों को पदनाम , फिंगरप्रिंट शाखा में मात्र 3 लोगों को पदनाम और पुलिस रेडियो शाखा में मात्र 11 लोगों को पदनाम, पुलिस फोटो शाखा में मात्र 2 लोगों को पदनाम देकर खानापूर्ति की गई वही देखा जाए तो प्रोमोशन की लाइन में हजारों पुलिसकर्मी लगे हुए है जिनका वरीयता के आधार पर पदनाम मिलना लगभग तय माना जा रहा था वही पदनाम देने पर मध्य प्रदेश सरकार के ऊपर कोई वित्तीय भार नहीं पढ़ना है साथ ही कर्मचारियों को कोई आर्थिक लाभ नहीं मिलने वाला लेकिन उसके बावजूद भी मध्य प्रदेश सरकार ने पुलिस कर्मचारियों के साथ इस तरह का प्रक्रिया अपनाकर पुलिस कर्मचारियों के साथ धोखा , छलावा किया हुआ प्रतीत होता है जो कर्मचारी पिछले 5 वर्ष से पदोन्नति की राह देख रहे थे उनके साथ मध्य प्रदेश सरकार के द्वारा किया हुआ छलावा है जिससे कर्मचारियों में हीन भावना आएगी साथ ही प्रोमोशन की राह देख रहे पुलिसकर्मियों में सरकार के प्रति असंन्तोष भी फैला हुआ है ।

वन्यजीवों के अंगों के बड़े कारोबार का हुआ खुलासा , वनप्राणियों के अंग कैसे पहुंचे दुकान तक, कौन रहा इन्हें दुकान तक पहुंचाने में शामिल जांच का विषय

गुना । शहर में वन्य जीवों के अंगों के बड़े कारोबार का खुलासा हुआ है. वन विभाग द्वारा पंसारी की दुकान से जानवरों के प्रतिबंधित अंग बरामद किए गए हैं. फिलहाल मामले की जांच जारी है । दरअसल, सिटी कोतवाली थाना क्षेत्र के सदर बाजार स्थित पंसारी की दुकान में वन्य जीवों के अंगों का व्यापार होने की सूचना वन विभाग के अधिकारियों को मिली थी. सूचना के आधार पर वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची तो वहां वन्य प्राणियों के अवशेष पाए गए । गुना वनमंडल में लगातार अनियमितता एवम अवैध तरीक़े से अतिक्रमण की घटनाये लगातार मीडिया में आती रही है ।  आज मुखबिर की सूचना पर वन विभाग गुना ने सदर बाजार गुना में पंसारी की दुकानो पर कार्यवाही को अंजाम दिया इस कार्यवाही में पंसारी की दुकान से वन्यप्राणियों के अंग अवैध तरीके से रखना पाया गया है । शुक्रवार 12 मार्च 2021 को मुखबिर की सूचना पर शहर गुना में संचालित आशीष जैन पन्नालाल , बाबूलाल जैन पंसारी निवासी छोटी मज्जिद गली एवम सचिन अग्रवाल ,जगन्नान्थ गोपीलाल पंसारी निवासी सदर बाजार गुना की दुकानों पर बनमण्डलधिकारी गुना के निर्देशन में वन अमले ने एक साथ छापा मार कार्यवाही की उक्त कार्यवाही में दोनों दुकानों से अवैध तरीके से वन्यप्राणियों के अंगों को रखना पाया गया है जिन्हें मोके से जप्त किया गया । वही वन अमले की इस कार्यवाही से दुकानदारो में हड़कंप मच गया ।
आखिर वन्यप्राणी के अंग कैसे पहुंचे पंसारी की दुकान तक – छापा मार कार्यवाही में वन्यप्राणियों के अंग अवैध तरीके से पंसारी के दुकान पर मिलने से हड़कम्प मच गया वही अब जांच में सामने आ सकेगा कि वन्यप्राणी के अंग उक्त पंसारी की दुकान तक कैसे पहुंच ओर इसमे को कोन शामिल है । इन वन्य जीवों के अंग कहां से आए और कब से इसका व्यापार किया जा रहा है, ये साफ नहीं हो पाया है किन्तु गुना में जानवरों के अंग बेचने का मामला बड़े स्तर पर चलाया जा रहा था । वहीं यह भी संभावना जताई जा रही है कि अन्य प्रांतों के इन तस्करों से तार मिले हुए हैं ।
लगातार हो रहा वन्यप्राणीयो का शिकार – गुना वनमंडल में लगातार अवैध शिकार के मामले सामने आ रहे है अभी हाल ही ही नीलगाय के शिकार के बाद वन अमले ने शिकारियों को गिरफ्तार किया था वही आज हुई छापा मार कार्यवाही में वन्यप्राणियों के अंगों का मिलना कही न कही बड़े पैमाने पर हो रहे अवैध शिकार की घटनाओं की ओर इशारा कर रहा है वही आज पंसारी की दुकान मामले में  जांच होने के बाद ओर भी लोगों के संलिप्त होने की आशंका है वही लगातार शिकार की घटनाएं सामने आने से वन्यप्राणि प्रेमियों ने रोष व्यक्त कर कठोर कार्यवाही करने की अपील वन विभाग गुना से की है जिससे भविष्य में शिकार की घटनाये घटित होने से रोका जा सके जिससे बेजुबान वन्यप्राणीयो को संरक्षित किया जा सके ।

वन विभाग का कारनामा आया सामने, मजदूरों से गठ्ठे खुदवा कर, पैसे देने के नाम पर दिखा दिया ठेंगा, न्याय की गुहार लगाने अपने बोरिया बिस्तर लेकर मजदूर पहुचें कलेक्ट्रेट कार्यालय

गुना ।  वुधवार दोपहर मजदूरों का 3 दर्जन से अधिक एक दल अपने वोरिया-विस्तर के साथ कलेक्ट्रेट कार्यालय परिसर के वाहर बैठा नजर आया । जब उनसे वैठने की वजह पूछी गई तो मामला चौंकाने वाला था मजदूरों ने बताया कि वह कलेक्टर सहाब के पास अपने किए गए काम के पैसे ना मिलने की शिकायत करने पहुचें हैं । यूँ तो आये दिन गुना वनमंडल में अनियमितता ओर घोटालो की खबरे सामने आती रही है किंतु न जाने क्या बजह है कि नवागत वनमण्डलाधिकारी भी कार्यवाही करने से पीछे हट रहे है ताजा मामला  रेंज आरोन , मकसूदनगढ़ का है जहां पर हजारो की संख्या में मजदूरों से गड्ढे खुदवाये गए थे किंतु मजदूरी करने के वाद भुगतान न होने से आक्रोशित  मजदूरों ने कलेक्ट्रेट कार्यालय में आकर  कलेक्टर को अपनी पीड़ा से अवगत कराया । परिसर में मौजूद मजदूर पंजाब गोड़ ने बताया कि वन विभाग ने वृक्षारोपण क्षेत्र में पौधों को रोपने के लिए हमे जिले से बाहर से लाकर हजारो की संख्या में गड्ढे तो खुदवा लिये किन्तु जब हमारे पैसे देने की बारी आई तो ठेंगा दिखा दिया इतना ही नही हमे बोल दिया गया कि जो दिखे सो कर लो अब पैसा नही मिलेगा जब हम गरीब लोगों का पैसा हमे डूबता हुआ दिखाई दिया तो हम न्याय की गुहार लगाने श्रीमान के पास आये है वही इस मामले दिलचस्प बात तो तब सामने आई जब ये मजदूर अपने बोरिया बिस्तर लेकर कलेक्टोरेट कार्यालय में आ गए जैसे ही इसकी जानकारी वन विभाग के आला अधिकारियों को लगी तो आनन फानन में एक पूरी की पूरी टीम मजदूरों को समझाने बुझाने के लिए कलेक्टर कार्यालय में आ गयी किन्तु मजदूरों ने साथ जाने से मना कर दिया लगभग 2 से 3 घण्टे चले हाई बोल्टेज वार्तालाप के बाद मजदूर वन विभाग के कार्यालय में जाने को तैयार हुए जिन्हें वन विभाग के द्वारा अपनी गाड़ियों में बैठाकर वनमंडल गुना लाया गया ।

गड्डो के भुगतान को लेकर विवाद – मजदूरों के द्वारा बताया गया कि वन विभाग के द्वारा एक गड्डा खोदने पर उन्हें 15 रुपये के हिसाब से भुगतान किया जाना रहा था किंतु शासन के रेट अनुसार एक गड्ढे के लिए 16 रुपये भुगतान का प्राबधान है अगर मजदूूूरों की बात को सच माने तो ये प्लांटेशन घोटाला हजारो लाखो की हेर फेर की ओर इशारा कर रहा है मामले में वन विभाग के अधिकारियो ने कुछ भी बोलने से इंकार कर दिया है ।

वनक्षेत्र में बढ़ रही शिकार की घटनाएं , हुआ नीलगाय का शिकार , 5 आरोपी गिरफ्तार

गुना । गुना वनमंडल में आये दिन अलग अलग माध्यमो से अवैध कटाई ,अवैध शिकार की घटनाएं प्रकाश में आती रहती है जिनपर कभी-कवार वन विभाग कार्यवाही कर वाहवाही लूट लेता है किन्तु फिर एक बार शिकार का सिलसिला चालू हो जाता है ताजा मामला गुना रेंज की बीट गेडाबर्रा का है जहाँ पर शिकारियों के द्वारा एक नीलगाय का शिकार का मामला सामने आया है जिसपर वन विभाग के अमले ने कार्यवाही करते हुए शिकारियों के साथ साथ एक टैक्सी , दो पहिया वाहन व कुल्हाड़ी को जप्त किया है किंतु यहां उल्लेखनीय है कि वन विभाग में बीटगार्ड के जंगल मे रहने व सतत वन में गश्त करने का नियम है इसके बाद भी लगातार शिकार की घटनाएं होना व  उसके बाद अपराधियों को गिरफ्तार करना इस प्रकिया में एक बेजुवान वन्यजीव मौत के गले मे समा जाता है वही अगर वन विभाग के बीटगार्डो के मुख्यालय पर जाकर देखा जाए तो लगभग सभी बीटगार्ड गुना में रहकर अप डाउन करते है जिसका खामियाजा बेजुबान जीवो को देना पड़ रहा है वही वनचोकीयों की स्थिति भी दयनीय है आज शारदा एक्सप्रेस की टीम ने वनचोकी छिपोन पर जाकर देखा तो वनचोकी होने के बाद भी वहां पर कोई वनकर्मी नजर न आया ।वन क्षेत्र में हो रही अवैध कटाई , अतिक्रमण एवम शिकार की घटनाओं ने एक ओर वन विभाग के वनकर्मियों के मुख्यालय पर रुकने की बात को हवा हवाई कर दिया है देखना होगा कि नवागत वनमण्डलाधिकारी के आने के बाद वन चौकियों , बीटगार्ड के मुख्यालय पर न रुकने को लेकर क्या करहवाही होगी ।

बड़खेड़ाहाट गांव में हुए शिकार की गुत्थी अनसुलझी – पिछले बर्ष बड़खेड़ाहाट में हुए हिरण कांड का खुलासा अभी तक वन विभाग नही कर पाया है जबकि मोके पर से ही आरोपीयो की गिरफ्तरी तक हो गयी थी किन्तु अभी भी मामला जांच में है रेंज आरोन के रेंजर को इस बारे में जानकारी के लिए कॉल किया गया जो कवरेज क्षेत्र से बाहर आया ।आज के बिगड़ते वन परिवेश में वन्य प्राणियों के जीवन की रक्षा के लिए शासन को कठोर कार्यवाही करने की जरूरत है अब देखना होगा कि नवागत बनमण्डलधिकारी लापरवाह वन अफसरों पर क्या कार्यवाही करते है जिससे वन्यजीवो की सुरक्षा को सुनिश्चित किया जा सके ।

वनोपज का अवैध परिवहन , खुल सकती है भ्रष्टाचार की पोल

गुना । गुना वनमंडल में लगातार अनियमितताओं के बाद भी सुधार होता नही दिख रहा है अभी हाल ही में एक वनकर्मी के अवैध तरीके से बसूली करते हुए वीडियो वायरल होने का मामला ठंडा भी नही हुआ था कि एक नया मामला सामने आ रहा है शारदा एक्सप्रेष न्यूज़ को अपने सूत्रों से पता लगा कि एक ट्रैक्टर ट्रॉली में लकड़ियों को भरकर अवैध तरीके से परिवहन किया जा रहा तो हमारी टीम के द्वारा वनमण्डलाधिकारी गुना को मामले से अवगत कराया गया साथ मे अवैध रूप से लकड़ियों से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली को रोककर परिवहन के बारे में पूंछा तो ट्रैक्टर चालक के द्वारा कोई T. P न होना बताया गया वही ट्रैक्टर ट्रॉली के आगे पीछे चल रही 2 मोटर साइकिलों पर सवार लोगों ने बताया कि ये ट्रैक्टर हिलग्ना डिपो ले जाया जा रहा है अब सवाल उठता है कि क्या यह सच है कि वाकई में लकड़ियों से भरे ट्रैक्टर ट्रॉली को डिपो ले जाया जा रहा था ? यदि है तो चालान या ट्रांजिट पास जारी क्यों नही किया गया ? मामले में किसकी लापरवाही है ? वही सूत्रों की माने तो डिपो पर परिवहन का नाम लेकर अवैध तरीके से लकड़ियों का परिवहन कर आरा मशीनों पर आए दिन ले जाता है वही गुना के एक नामी डिप्टी रेंजर के पास एक मोटी रकम इन ट्रैक्टर ट्रॉली को निकलवाने के लिए दी जाती है अब मामले में सच क्या है वो तो जांच के बाद ही सामने आ पायेगा किन्तु देखना होगा की वनमंडल में चल रही अनियमितताये रुकने का नाम लेंगी या यूँही चलती रहेंगी ।

खबर प्रकाशन के बाद विभाग ने दिखाई सख्ती रिश्वत लेते वायरल वीडियो मामले में वनरक्षक निलंबित

गुना । गुना वनमंडल में लगातार हो रही अवैध कटाई , अतिक्रमण के बीच कल वनाधिकार देने के नाम पर रुपये लेने के वनरक्षक का वीडियो वायरल होने के पर शारदा एक्सप्रेस के द्वारा खबर को प्रमुखता से उठाया गया था वही खबर मीडिया में आने के बाद वन विभाग में भोपाल स्तर तक हड़कम्प मच गया था जिसके बाद वनमण्डलाधिकारी गुना ने अपने एक आदेश में बीटगार्ड अजय पटेलिया को निलम्बित कर आरोन भेज दिया है वही अब संलिप्त वनकर्मियों पर कार्यवाही होने से वन विभाग में हड़कम्प मचा हुआ है ।

वर्षो से जमे वनकर्मियों की कब होगी सर्जरी – आये दिन हो रही घूसखोरी की खबरों से वन विभाग का आये दिन सामना हो रहा है वही अतिक्रमण , अवैध कटाई के मामले किसी से छिपे नही है मामले की पड़ताल करने पर पता लगता है कि अकेले गुना रेंज में ही बीट भदौरा , तिनस्यायी , पटना , दिनोला पर वर्षो से वनकर्मी जमे हुए है जिनका तबादला न होने से वन क्षेत्र में लगातार अनियमितता होने की खबरे सामने आती रही है अब देखना होगा कि नवागत वनमण्डलाधिकारी कैसे इन सब से पार पाते है ।

2 हजार रूपऐ दो वनाधिकार लो , वनरक्षक का पैसे लेते हुऐ वीडियो हुआ शोशल मीडिया पर वायरल, क्या अभी भी सोते रहेंगे जिम्मेदार

गुना । 2 हजार रूपऐ दो और वन अधिकार लो जी हां सही सुना आपने कुछ ऐसा ही वाक्य आज सोशल मीडिया पर एक वीडियो के माध्यम से सामने आया है जहां एक वनरक्षक गरीब आदिवासी लोगों से वन अधिकार के नाम पर 2 हजार रुपऐ की मांग करता स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है । शारदा एक्सप्रेस वायरल वीडियो की सत्यता की पुष्टि नही करता है । गुना वनमंडल में लगातार हो रही अवैध कटाई , अतिक्रमण की खबरे लगातार शारदा एक्सप्रेस न्यूज के द्वारा प्रकाशित की जाती रही है किन्तु जिम्मेदार वनाधिकारियों के द्वारा अपने चहेते वनकर्मियों पर कार्यवाही न करना आज वन विभाग पर इतना हावी हो चुका है कि वनों के रक्षक ही भक्षक बने हुए है । वही ताजा मामला व्हाट्सप्प ग्रुप में वायरल हो रही वीडियो का है जो गुना रेंज की सबरेंज खेरिखता की बताई जा रही है । जहाँ पदस्थ वनरक्षक जो कि बीट ख़ैरिखता पर पदस्थ है वह वनों में रहने बाले आदिवासी समुदाय के लोगों से वनाधिकार देने के नाम पर दो दो हजार रुपये की की रिश्वत लेते हुए दिखाई दे रहा है वही वीडियो में उक्त वनरक्षक अपने वरिष्ठ अधिकारी के नाम पर पैसे लेकर उनको भी अपशब्द कहते हुए सुना जा सकता है मामले में वनरक्षक के द्वारा 1500 नगद एवम 500 शाम को लेने की बात सुनाई दे रही है ।

पूर्व से विवादित रहा है कार्यकाल – सूत्रों की माने तो उक्त वनरक्षक पास के ही ग्राम का रहने बाला है जिसके द्वारा पूर्व में भी पैसे लेकर सेंकडो बीघा जमीन पर अवैध तरीके से अतिक्रमण कराया गया था वही सूत्रों की माने तो बीट ख़ैरिखता में लगातार अवैध कटाई ओर अतिक्रमण की घटनाएं बढ़ रही है ।

परिक्षेत्र सहायक की भूमिका भी सन्दिग्ध – बीट में वनकर्मी के द्वारा पैसे मांगने व अवैध गतिविधियों के लगातार सामने आने के बाद भी परिक्षेत्र सहायक के द्वारा वरिष्ठ तक सूचना न करना व कार्यवाही न करना भी लापरवाही दिखाता है वायरल वीडियो मामले में सबरेंज ख़ैरिखता की सभी बीटों की जांच वरिष्ठ स्तर से की जाकर लापरवाह वनकर्मियों पर कठोर कार्यवाही होनी चाहिए ।

पंचायत मंत्री की विधानसभा का है मामला – ज्ञात हो कि वायरल वीडियो ख़ैरिखता सबरेंज का है जो कि पंचायत मंत्री श्री सिसोदिया का विधानसभा क्षेत्र है जो कि अपनी विधानसभा में वनभूमि पर वनवासियों को उनके हक के लिए हमेशा अग्रणी रहे है ।
शर्मशार करने बाली घटना – आज वायरल वीडियो से वन विभाग शर्मसार है जिस वन विभाग के मंत्री आदिवासियों के विकास की बात करते है उन्हें वनाधिकार देने की बात करते है उसी वन विभाग के वनकर्मी के द्वारा इस तरह से गरीब लोगों की कमाई को चूना लगाकर भ्रष्टाचार करना कहि न कही अपने वरिष्ठ अधिकारियों को खुली चुनौती पेश करना है अब देखना होगा कि वन विभाग के आला अधिकारी ऐसे संलिप्त वनकर्मियों पर क्या कार्यवाही करते है ।

लगातार हो रहा वनों का विनाश ओर घोर अनियमितताओं के बाद भी प्रशासनिक सर्जरी से बचा हुआ है वनमंडल गुना

गुना । मध्यप्रदेश शासन का वन विभाग यू तो टाइगर स्टेट का दर्जा प्राप्त करके बैठा हुआ है लेकिन इसी विभाग के गुना वनमंडल में अवैध कटाई , अवैध अतिक्रमण , उत्खनन , के मामले लगातार बढ़ने के बाद भी कार्यवाही न होना गुना से लेकर वन मुख्यालय तक चर्चाओ में बना हुआ है यदि वन मण्डल गुना में फैली अनियमितताओं ओर लापरवाही पर वरिष्ठ स्तर से कार्यवाही हो जाये तो सम्भवता वनों के विनाश को रोका जा सकता है ।


हजारो सागवान के पेड़ों की बलि – गुना रेंज की बीट खायवदा , खड़गपुर ,छिपोन में लगातार बड़े स्तर पर सागोन की अवैध कटाई जारी है किन्तु वन अधिकारियों के द्वारा अवैध कटाई पर अंकुश लगा पाना मुश्किल दिखाई देता लग रहा है वही बमोरी तहसील के पटना , मड़ाई मुंडी , लपचोरा बीटों में अवैध कटाई जोरो पर है ।


अवैध उत्खनन चर्म पर – गुना रेंज की बीट अगरा , भदौरा , खेरिखता, धानबाड़ी , बेड़खेड़ी , खायवदा , मड़ई मुंडी में बड़े पैमाने अवैध तरीके से बोरिंग करवाई गई है जिनकी जानकरी वनकर्मियों से लेकर वन संरक्षक को है पर आज तक कोई कार्यवाही न हो सकी है ।


हजारो हेक्टेयर वन भूमि पर अतिक्रमण – पिछले 6 महीने में बमोरी , फतेहगढ़ में हजारो हेक्टेयर वनभूमि पर आए दिन अतिक्रमण होता रहा है किंतु बीटगार्ड से लेकर DFO तक किसी अधिकारी ने कार्यवाही करने की हिमाकत नही की है परिणामस्वरूप बमोरी फतेहगढ़ का फारेस्ट एरिया जल्द ही खत्म होने की कगार पर है अतिक्रमण की खबरे शारदा एक्सप्रेस ने लगातार प्रकाशित की है उदाहरण बीट मड़ाई मुंडी की खैरा मार बाली जगह जहां 500 बीघा में इसी वर्ष अतिक्रमण हुआ है मुख्यालय स्तर से जल्द ही अगर प्रभावी कार्यवाही नही होती है तो वो दिन दूर नही जब जंगल का नामो निशान मिट जाएगा ।


वर्षों से एक ही बीट पर जमे वनकर्मी – सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार वनमंडल की अनेकों बीटों पर वनकर्मी पांच या अधिक वर्षो से एक ही जगह जमे हुए है जबकि वन मुख्यालय के स्पष्ठ निर्देश है कि बीटगार्ड से लेकर रेंजर तक किसी को एक ही जगह तीन वर्ष से अधिक न रखा जाए वही ड्यूटी लगाने के नाम पर अपने चहेते वनकर्मियों को मनमानी पोस्टिंग आला अधिकारी समय समय पर देते रहे है यहां उल्लेखनीय है कि ट्रान्सफर पर बैन होने के बाद इस तरह से पोस्टिंग देना नियम विरुद्ध है ।


वानिकी कार्यों में जमकर अनियमिता – वन विभाग के द्वारा कराए जा रहे प्लान्टेसनो एवम अन्य वानिकी कार्यों की जांच मुख्यालय स्तर से कराई जाए तो सच सामने आ जायेगा करोड़ो के बजट का मात्र 30 से 40 प्रतिशत में वानिकी कार्य कराए जा रहे है जिससे कार्य की गुणवत्ता के चलते आज किसी भी प्लान्टेसनो में जाकर देखा जाए तो वहां आधे से भी कम पौधे जीवित मिलेंगे वही बीटों में रखे जाने बाले सुरक्षा श्रमिको के मामले में भी अनियमितता का खुलासा जांच में हो जाएगा किस तरह से अन्य खातो में पैसों को डालकर निकलवाया जाता रहा है ।सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कैम्पा प्लान्टेसनो में नाली खुदाई कार्य जो कि मजदूरों से कराया जाना चाहिए उसको JCB से कराया जाता है किन्तु बजट को मजदुरो के खातों में डालकर निकाल लिया जाता है ।


लापरवाह अफसरों पर मेहरबान अधिकारी – सूत्रों से मिली जानकारी अनुसार गुना वनमंडल अंतर्गत पदस्थ अधिकांश सबरेंज प्रभारी घर बैठकर ड्यूटी को अंजाम दे रहे है जिसके फलस्वरूप वनों में अवैध कटाई , अतिक्रमण को बढ़ावा मिला है वही इनकी उदाशीनता के चलते लम्बित वन अपराध प्रकरण कालातीत हो रहे है किंतु ऐसे लापरवाह सबरेंज प्रभारियों पर आज तक कार्यवाही करने की हिमाकत वन अफसर नही कर पा रहे है खबर है कि इन्ही प्रभारियों के द्वारा बजट का बन्तरबात किया जाता है शारदा एक्सप्रेस न्यूज़ इसकी पुष्टि नही करता किन्तु लापरवाही पर कार्यवाही न होना कहि न कही सन्देह पैदा करती है ।


बिना T. P. हो रहा लकड़ियों का परिवहन – वन मण्डल अंतर्गत आने वाली अधिकांश आरा मशीनों पर रोज ट्रैक्टर ट्रॉली भरकर अवैध तरीके से लकड़ियों का बेरोकटोक परिवहन किया जा रहा है अभी हाल ही में एक ट्रैक्टर ट्रॉली को रोककर बाद में छोड़ देनी की घटना न्यूज़ में चर्चा का विषय बनी हुई थी कि ऐसी क्या बजह रही कि बिना T. P के पकड़े जाने पर आधा घण्टे में ट्रैक्टर को छोड़ दिया गया ।


वनकर्मियों पर नही कोई कार्यवाही – सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार उपवनमण्डल अधिकारी गुना के द्वारा कराई गयी जांच में 2 वनकर्मी एवम एक सब रेंज प्रभारी के खिलाफ गम्भीर लापरवाही उजागर हुई थी किन्तु माह बीत जाने के बाद भी अभी तक कार्यवाही न होना रेंज में चर्चा का विषय है । उपरोक्त वर्णित अनियमितता , अवैध अतिक्रमण , अवैध उत्खनन , अवैध कटाई की यदि वन मुख्यालय स्तर से जांच कराई जाकर अपराधियों एवम संलिप्त वन अधिकारियों पर कार्यवाही की जाए तो सम्भवता गुना जिले के वन क्षेत्र को नष्ट होने से बचाया जा सकता है ।