संपूर्ण सनातन ब्राह्मण महासभा की बैठक 20 को, गायत्री मंदिर पर होगा वैठक का आयोजन

गुना । संपूर्ण सनातन ब्राह्मण महासभा मध्य प्रदेश के जिला स्तरीय बैठक का आयोजन गायत्री शक्तिपीठ गुना पर 20 अक्टूबर 2021को दोपहर एक बजे से किया जाएगा जिला अध्यक्ष ओम प्रकाश शर्मा एवं संपूर्ण सनातन ब्राह्मण महासभा के प्रदेश संयोजक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि संपूर्ण ब्राह्मण समाज की परिचय सम्मेलन के बारे में बैठक आयोजित की जा रही है जिसमें जिले एवं शहर की कार्यकारिणी के साथ-साथ संपूर्ण विकास खंडों में महिला कार्यकारिणी एवं युवा प्रकोष्ठ का गठन भी किया जाना है ब्राह्मण समाज कि जो महिलाएं एवं युवक जिला स्तर पर कार्यकारिणी में शामिल होकर कार्य करने के इच्छुक हैं वह कृपया बैठक में अवश्य उपस्थित होने का प्रयास करें ताकि उन्हें दायित्व दिया जा सके। जिले के संयोजक अरविंद पाराशर ने जिले के सभी कार्यकारिणी के सदस्यों के साथ साथ ही सभी संगठन के ब्राह्मणों से बैठक में उपस्थित होने का अनुरोध किया है।
संपूर्ण सनातन ब्राह्मण महासभा द्वारा विगत 11 वर्षों से गुना जिले में लगातार प्रदेश स्तर पर निरंतर युवक युवती परिचय सम्मेलन का आयोजन किया का रहा है । बैठक में युवक युवती परिचय सम्मेलन की दिनांक एवं स्थान के बारे में निर्णय किया जाएगा।

विजयादशमी की रात तक हुआ दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन

गुना। नवरात्रि की पूर्णाहूति के बाद विजयादशमी महोत्सव शक्ति के प्रदर्शन का पर्व माना जाता है। नौ दिनों तक मां शक्ति की उपासना के बाद ही विजय की प्राप्ति होती है। विराट हिन्दू उत्सव समिति के संस्थापक कैलाश मंथन ने चिंतन हाउस में शस्त्र पूजन एवं नि:शुल्क गीता सुंदरकांड वितरण कार्यक्रम के दौरान विचार व्यक्त करते हुए कहा कि भगवान राम ने मां शक्ति की भक्ति को सिद्ध करके ही अमरता का वरदान प्राप्त असुर रावण पर विजय प्राप्त की। भगवान श्रीराम का चरित्र अनुकरणीय है। कार्यक्रम के दौरान नि:शुल्क गीता एवं रामकथा सुंदरकांड का वितरण भक्तों में किया गया। इस दौरान चिंतन हाउस सर्राफा में प्रमुख कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
दशहरा की देर रात तक होता रहा दुर्गा प्रतिमाओं का विसर्जन
नवरात्रि महोत्सव के तहत दुर्गा विसर्जन विजयादशमी की देर रात तक चलता रहा। चिंतन मंच के तहत झांकी समितियों को विराट हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने जय मां अम्बे सम्मान पत्र देकर सम्मानित किया। चल समारोह के तहत नवमी की देर रात तक शहर एवं अंचल की झांकियों विसर्जन के लिए निकलती रहीं। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन के मुताबिक शहरी क्षेत्र में करीब ढाई सौ प्रतिमाएं विसर्जित की गई। चल समारोह पर कोविड-19 की छाया रही।
हिउस द्वारा 250 झांकियों को किया गया सम्मानित
नवरात्रि महोत्सव के तहत हिउस द्वारा जिले की नौ सर्वश्रेष्ठ झांकियों को चिंतन शील्ड एवं 27 झांकियों को प्रतीक एवं सम्मान पत्र दिए गए। वहीं इस वर्ष की ऐतिहासिक चिंतन शील्ड मां निहाल देवी के भव्य दरबार को भेंट की गई। विराट हिन्दू उत्सव समिति चिंतन मंच के संस्थापक कैलाश मंथन के मुताबिक नवरात्रि के दौरान कोविड-19 गाईडलाईन पालन, उत्तम प्रदर्शन, श्रेष्ठ सेट्स, विद्युत सज्जा, प्रतिमा की आकृति, सुरक्षा, स्थान चयन के हिसाब से सर्वश्रेष्ठ 9 झांकियों को चिंतन शील्ड प्रदान की गई है। वहीं 250 झांकियों को सम्मान पत्र देकर पुरस्कृत किया गया। इस मौके पर हिउस प्रमुख श्री मंथन ने कहा कि वर्तमान विपरीत काल में सारे समाज को विशेष सावधानी की जरूरत है। नवरात्रि पर मां की भक्ति विशेष शक्ति प्रदान करती है। आत्मबल एवं शक्ति की जाग्रति का पर्व ही नवरात्रि एवं विजयादशमी है। इस अवसर पर विजयादशमी की बधाई देते हुए श्री मंथन ने कहा कि हम अपने आप पर विजय प्राप्त करें। काम, क्रोध, मद, लोभ आदि विकारों पर विजय प्राप्त करना ही एवं सहनशील बनना ही विजयादशमी का संदेश है।

देवी विसर्जन के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करें प्रशासन-कैलाश मंथन

गुना। नवरात्रि विसर्जन के दौरान बीते सालों में हुए हादसों से प्रशासन सबक ले। अंचल की नदियों, तालाबों, क्रेशर के गढ्डों एवं अन्य विसर्जन स्थलों पर कुशल तैराकों, गोताखोरों एवं पुलिस के पुख्ता इंतजाम करने की मांग हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने की है। श्री मंथन के मुताबिक बीते सालों में विसर्जन स्थलों पर विसर्जन के दौरान एक दर्जन लोगों एवं बच्चों की आकाल मौतें हुई हैं।
उधर नवरात्रि पर चिंतन मंच के तहत परम्परानुसार श्रेष्ठतम झांकियों को पुरस्कृत किया जाएगा। विराट हिन्दू उत्सव समिति चिंतन मंच के संस्थापक संयोजक कैलाश मंथन के मुताबिक अंचल में लगने वाली करीब 3 हजार पांडालों में विराजमान मां की श्रेष्ठ छवियों वाली झांकियों में 250 श्रेष्ठ झांकियों को मां अम्बे सम्मान पत्र से सम्मानित किया जाएगा। शहरी क्षेत्र में लगने वाली यंत्र चलित एवं स्थिर झांकियों को पुरस्कृत किया जाएगा। सन 1983 से चिंतन मंच के तहत झांकियों को संयोजक कैलाश मंथन द्वारा चिंतन शील्ड प्रदत्त की जाती है। इस वर्ष सर्वश्रेष्ठ झांकी को विशेष चिंतन शील्ड से पुरस्कृत किया जाएगा।
कोविड-19 के दौरान इस वर्ष का नवरात्रि महोत्सव विशेष रूप से ऐतिहासिक महत्व रहा। पिछले वर्षों की तुलना में इस वर्ष पांडालों में मां दुर्गा की प्रतिमाओं की स्थापना में कुछ हद तक कमी आई है, लेकिन भक्तों के उत्साह एवं श्रद्धा में वृद्धि हुई है। विराट हिन्दू उत्सव, चिंतन मंच के संयोजक कैलाश मंथन के मुताबिक कोरोना काल के चलते अंचल के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्र में करीब तीन हजार से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की प्रतिमाएं स्थापित किए जाने के समाचार प्राप्त हुए हैं। जबकि पिछले वर्ष पांच हजार से अधिक स्थानों पर मां दुर्गा की झांकियां सजाई गई थीं। कोरोना महामारी के चलते इस वर्ष संपूर्ण सनातन समाज में विशेष श्रद्धा एवं भक्ति के साथ मां शक्ति की आराधना कर इस महामारी से निजात पाने की प्रार्थना की जा रही है।
जिले के दूरस्थ एवं जंगली इलाकों में भी नवरात्रि महोत्सव के तहत मां दुर्गा के पांडाल स्थापित हुए हंै। आदिवासी एवं जंगली क्षेत्रों में स्थित ग्रामों में दो से पांच प्रतिमाएं स्थापित की गई है। गुना शहर में करीब 150, बीनागंज, चांचौड़ा, राघौगढ़, आरोन, म्याना, कुंभराज, मधुसूदनगढ़, बमोरी, फतेहगढ़ सहित अन्य ग्रामों, कस्बों में 250 से ज्यादा प्रतिमाएं स्थापित हुई हैं। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन के मुताबिक मां दुर्गा शक्ति की उपासना का पर्व उत्साह से मनाया जा रहा है। गुना क्षेत्र के तहत कैंट, गुलाबगंज, रेलवे स्टेशन, श्रीराम कॉलोनी, भुल्लनपुरा, बूढ़े बालाजी, पुरानी छावनी, पठार मोहल्ला, सकतपुर, नानाखेड़ी, पिपरौदा, बायपास, चिंताहरण, गोपालपुरा, पाटई, ऊमरी, बजरंगगढ़, गुना ग्रामीण क्षेत्रों में मां दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं लगाई गई हैं।

शुभ मुर्हुत में हुई घटस्थापना, मां शक्ति की उपासना का पर्व है नवरात्रि: कैलाश मंथन

गुना। देश, धर्म, समाज की रक्षा के लिए मां शक्ति की भाव भक्ति श्रद्धा से उपासना कर बल और शक्ति की प्राप्ति की जाती है। विराट हिन्दू उत्सव समिति के अध्यक्ष कैलाश मंथन ने नवरात्रि पर्व पर घटस्थापना के अवसर पर विचार व्यक्त करते हुए कहा कि बिना अध्यात्म, शारीरिक बल, अर्थ बल प्राप्त किए देश की रक्षा करना असंभव है। इसलिए चातुमसि के दौरान अष्टभुजा भवानी मां दुर्गा की शक्ति के रूप में आराधना की जाती है। नवरात्रि में दुर्गा सप्तशती एवं राम रक्षा स्त्रोत आदि का पाठ करके शक्ति की सिद्धि की जाती है। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि भारतीय संस्कृति में सभी महान सफलताएं विजयश्री मां शक्ति की आराधना करके ही हुई है। भगवान राम, कृष्ण या जो सार्वभौम सम्राट थे सभी ने बड़े-बड़े साम्राज्य मां दुर्गा और लक्ष्मी की आराधना कर प्राप्त किए। नियम, संयम पूर्वक यदि नवरात्रि में सच्चे ह्दय से मां की भक्ति की जाएं तो अभीष्ठ सिद्धि प्राप्त हो सकती है। चिंतन हाउस में मां की स्थापना के साथ नवरात्रि पर्व का शुभारंभ हुआ। अंचल में देर रात मां भवानी की भव्य मूर्तियों को ढोल, नगाड़ों, बाजों के साथ पांडाल स्थलों पर ले जाया गया। समय, काल, परिस्थितियों की मांग है कि धर्म और आस्था के साथ सावधानी पूर्वक सभी त्यौहार मनाएं जाएं। ऐसा कोई कृत्य न किया जाएं, जिसके कारण अव्यवस्था, अशांति फैले। हिउस ने प्रशासन पुलिस से सभी स्थानों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था, निरंतर विद्युत एवं जल सप्लाई की मांग की।
कोविड काल में सावधानी जरूरी-हिउस
नवरात्रि एवं विशेष त्यौहारों के दौरान श्रद्धालुओं को भीड़भाड़ के दौरान विशेष्ज्ञ सावधानी, मुंह पर मास्क लगाना आदि सरकारी गाईडलाईन का पालन जरूरी है। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने प्रशासन से मांग करते हुए कहा कि स्वास्थ्य मंत्रालय सेनेटाईज, मास्क आदि झांकी पांडालों में उपलब्ध कराए। हिउस के तहत पारंपारिक तरीके से सभी झांकियों को सम्मानित किया जाएंगा।

नवरात्रि दशहरे पर 9 दिवसीय कार्यक्रम आयोजित, आठ दिवसीय होगा नवरात्रि महोत्सव, तृतीय चतुर्थी एक ही दिन होगी पूजा, शक्ति मां की उपासना करना प्रत्येक देशवासी का धर्म- कैलाश मंथन

गुना। नवरात्रि का पर्व शक्ति की आराधना का प्रमुख त्यौहार है। विराट हिंदू उत्सव समिति के संस्थापक कैलाश मंथन ने कहा कि देश, धर्म, समाज एवं मानवता की रक्षा के लिए प्रत्येक देशवासी का कर्तव्य है कि अपने को शक्तिशाली बनाएं। इसलिए वर्ष में दो बार मां शक्ति की आराधना कर आत्मबल सहित विभिन्न प्रकार की उन्नति करके सिद्धियों की प्राप्ति के लिए दुर्गा मां की आराधना की जाती है। इस वर्ष 7 से 15 अक्टूबर तक 8 दिवसीय नवरात्रि एवं दशहरा पर्व मनाया जाएगा। इस मौके पर 7 को घट स्थापना के साथ शैलपुत्री, द्वितीय दिवस ब्रह्मचारिणी, तृतीय दिवस एवं चतुर्थी एक होने से 9 अक्टूबर को चंद्रघंटा कूष्माण्डा, पंचमी को स्कंदमाता, 11 अक्टूबर को कात्यायनी, सप्तमी मंगलवार को कालरात्रि, अष्टमी को महागौरी एवं 14 अक्टूबर को महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजन होगी। इस बात पर तृतीया एवं चतुर्थी तिथि एक ही दिन होने से नवरात्रि 8 दिन की हो रही है। वहीं माता रानी की सवारी डोली में बैठकर आ रही हैं। 15 अक्टूबर बुधवार को विजयदशमी पर परंपरा अनुसार कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि सभी धर्मावलंबी जनहित, देशहित, समाज हित को समझते हुए कोरोना काल में सावधानीपूर्वक सादगी, सौहार्द, शांति से घरों एवं सार्वजनिक स्तर पर परंपरागत त्यौहार मनाएं।
प्रदेश सरकार एवं प्रशासन से पूर्ण सुरक्षा की
नवरात्रि पर हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने मांग की है कि अंचल में पूर्ण शांति के लिए विशेष सुरक्षा बल लगाया जाए। मूर्ति विसर्जन स्थानों पर विशेष सुरक्षा इंतजाम किए जाएं। नवरात्रि पर शहर के प्रमुख मार्गों पर विशेष विद्युत साफ-सफाई, निरंतर विद्युत एवं जल सप्लाई की जाए। मंदिर पहुंच मार्गोंं की मरम्मत कराई जाए। शक्तिपीठों निहाल देवी, मां बीस भुजा भवानी आदि स्थानों पर विशेष सुरक्षा की व्यवस्था की जाए।

अनंत चतुदर्शी पर होने वाले कार्यक्रमों पर कोरोना का साया, प्रशासन पिछले हादसों से सबक ले- कैलाश मंथन

गुना। दस दिवसीय श्रीगणेशोत्सव का भव्य समापन 19 सितंबर अनंत चौदस को होगा। प्रशासनिक सख्ती के चलते कोई भी सार्वजनिक कार्यक्रम अथवा चल समारोह नहीं होगा। विराट हिन्दू उत्सव समिति के अध्यक्ष कैलाश मंथन ने कहा कि परंपरानुसार गणेश विसर्जन समारोह किया जाएगा। इस अवसर पर कैंट एवं गुना क्षेत्र में अनंत चौदस पर विसर्जित होने वाले श्रीगणेश पांडालों से सीधे विसर्जन स्थल पर पहुंचेंगे। नगरपालिका गुना द्वारा गणेश विसर्जन के लिए डोल ग्यारस की तरह कैंट एवं प्रमुख क्षेत्रों में चार पहिया वाहनों की व्यवस्था की गई है।
इसके पूर्व विराट हिन्दू उत्सव समिति के तहत डोल ग्यारस पर्व पर कोविड-19 नियमों के अनुसार श्री गणेशजी का विसर्जन किया गया। इस अवसर पर नगरपालिका के वाहनों में की गई व्यवस्थानुसार विराट हिन्दू उत्सव समिति चिंतन मंच के अध्यक्ष कैलाश मंथन ने पोस्ट ऑफिस, हाट रोड पर श्री गणेशजी के प्रथम वाहन का पूजन अर्चन किया। इस अवसर पर हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि कोरोना संकट के तहत विपरीत काल के चलते श्रद्धालुओं अथाह धैय का परिचय दिया है। कोविद-19 के तहत सरकारी  गाईडलाईन के चलते परंपरागत भव्य त्यौहार पर सार्वजनिक कार्यक्रम स्थगित कर घरों में ही सादगी से गणेशजी का विसर्जन किया गया। श्री मंथन ने कहा कि गणेश जी संकटों का नाश करने वाले सर्वप्रथम पूजनीय देव हैं। डोल ग्यारस का त्यौहार भी श्रीगणेश की पूजा का प्रतीकात्मक पर्व है। गणेशोत्सव के तहत डोल ग्यारस के बिना सनातन धर्म की कल्पना नहीं की जा सकती है।
सरकारी लापरवाही का नमूना नगरपालिका ने दिखाया
हिउस प्रमुख श्री मंथन ने प्रशासनिक व्यवस्थाओं को सवालों के घेरे में लेते हुए कहा कि हिन्दुओं के सबसे बड़े त्यौहार पर स्थानीय प्रशासन की लापरवाही जाहिर हुई। हजारों परिवार श्री गणेश जी का विसर्जन करने से वंचित रह गए। डोल ग्यारस पर नपा प्रशासन द्वारा गणेश प्रतिमा के विसर्जन में भारी अव्यवस्थाएं देखी गई। शहर में लॉकडाउन एवं गाईडलाईन के नाम पर प्रशासनिक अमला ने हजारों श्रद्धालुओं की आस्था एवं श्रद्धा को चोट पहुंचाई है। वाहन व्यवस्था गड़बड़ा जाने से मंदिर परिसरों में हजारों मूर्तियां एकत्रित हो गई। जिन्हें निजी तौर पर विसर्जित कराया गया। वहीं शहर की साफ सफाई एवं विद्युत व्यवस्था भी गड़बड़ा गई है। नगरपालिका ने न तो शहर की साफ सफाई कराई और न ही स्ट्रीट लाईट लगाई गई। जबकि हर वर्ष प्राथमिकता से शहर के प्रमुख मार्गों पर विद्युत व्यवस्था, पीने के पानी की व्यवस्था एवं सफाई नपा द्वारा की जाती थी। बहुसंख्यक समाज की आस्था को चोट पहुंचाने वाले अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग हिउस ने की है। इस दौरान हिउस प्रमुख श्री मंथन ने अनंत चौदस पर व्यवस्थाएं चुस्त-दुरूस्त करने की मांग की है ताकि विसर्जन स्थलों पर होने वाले हादसों से बचा जा सके।

भगवान श्री विश्वकर्मा पूजन दिवस पर ओझा मेथिल धर्मशाला में आयोजित हुए विभिन्न कार्यक्रम

गुना । भगवान श्री विश्वकर्मा पूजन दिवस पर ओझा मेथिल धर्मशाला में तीन दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए जिसमें 15 सिंतवर को मेहंदी रंगोली चेयर रेस एवं एकल नृत्य प्रतियोगिता का आयोजन कर कार्यक्रम प्रारंभ किए गए 16 सितंबर को एकल गायन भाषण फैंसी ड्रेस एवं एकल अभिनय आदि प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया । अंतिम दिवस 17 सितंबर को भगवान श्री विश्वकर्मा पूजन दिवस पर कार्यक्रम का शुभारंभ कर सुंदरकांड पाठ का आयोजन किया गया इसके उपरांत प्रतियोगिताओं में भाग लेने वाली प्रथम द्वितीय एवं तृतीय पुरस्कार प्राप्त करने वाले प्रतिभागियों को पुरस्कार वितरण किया गया । कार्यक्रम में धर्मशाला ट्रस्ट के अध्यक्ष उपाध्यक्ष व महिला मंडल की अध्यक्ष उपाध्यक्ष व समाज के वरिष्ठजनों के साथ धर्मशाला ट्रस्ट की कार्यकारिणी के सभी सदस्य मौजूद रहे ।

परंपरानुसार मनाया जाएगा डोल ग्यारस, कोविड नियम के अनुसार निकलेंगे विमान, समग्र समाज की आस्था से छेड़छाड़ ठीक नहीं- कैलाश मंथन

गुना। कोरोना के नाम पर सरकारी गाईडलाईन ने भले ही त्यौहारों का बाहरी स्वरूप फीका कर दिया हो, लेकिन प्रथम पूज्य भगवान श्रीगणेश के प्रति अटूट आस्था, उत्साह सनातनी परिवारों में देखने को मिल रहा है। अंचल में विराट हिन्दू उत्सव समिति, चिंतन मंच के तहत राष्ट्रीय सांस्कृतिक विरासत दस दिवसीय श्री गणेशोत्सव की परंपरा को अक्षुण्य बनाए रखने में महत्वपूर्ण योगदान है। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि पिछले एक दशक से समिति के आव्हान पर पर्यावरण की रक्षा के लिए घरों में मिट्टी के गणेशजी की स्थापना का अभियान सफल रहा। इस वर्ष मिट्टी के गणेशजी की मूर्तियों की मांग बढऩे से पीओपी की मूर्तियां कम बिकी। समिति की बैठक में लिए गए निर्णयानुसार पिछले परंपरानुसार सभी मंदिर के विमानों एवं पांडाल में गणेशजी की झांकियों का सम्मान किया जाएगा। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन के मुताबिक पिछले वर्षभर धार्मिक, सामाजिक कार्यक्रमों में सक्रिय रहने वाली संस्थाओं, मीडिया संस्थानों, कोविड काल के दौरान विशेष सेवाएं अर्पित करने वालों को श्रीगणेश सम्मान पत्र से सम्मानित किया जाएगा।
डोल ग्यारस अनंत चौदस पर पूर्ण सुरक्षा व्यवस्था की मांग
विराट हिन्दू उत्सव समिति के तहत प्रशासन से त्यौहार के अवसर पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था, नियमित विद्युत, जल की सप्लाई, नपा एवं ग्रामीण क्षेत्रों में करने की अनुरोध किया है। वहीं डोल ग्यारस पर सभी विमान मंदिरों, गल्ला मंडी से पूजन पश्चात निर्धारित मार्ग से विसर्जन स्थलों के लिए रवाना होंगे। सभी अखाड़ेदार, अखाड़ों में पूजन उपरांत सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए परंपरा का पालन करेंगे। हिउस प्रमुख के मुताबिक पिछले साल प्रशासिनक एवं नपा अफसरों की लापरवाही के चलते शहर के हजारों गणेश भक्त परेशान हुए। शहर के प्रमुख मार्गों से विमान न निकलने की वजह से लोगों ने नपा द्वारा चौराहों पर स्थित किए गए वाहनों में घरों के गणेशजी विसर्जन के लिए रखवाए। कार्यक्रम के दौरान नौकरशाही हावी रही। आरोप है कि एक ओर प्रशासन राजनीतिक कार्यक्रमों में दबाव के चलते भीड़ इकट्ठा करने की छूट दे देता है वहीं समग्र समाज के त्यौहारों पर गाईडलाईन के तहत प्रतिबंधों को भरमार होने त्यौहार का उत्साह फीका पड़ जाता है। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने समस्त धर्मावलंबियों से शांति, सौहार्द, सद्भाव से त्यौहार मनाने की अपील की है।
निरंतर बिजली और साफ सफाई की मांग
जैन समाज के पर्यूषण पर्व एवं दस दिवसीय गणेशोत्सव एक साथ होने से शहर के मंदिरों में दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ रही है। लेकिन बिजली के बार-बार जाने, लगातार साफ सफाई न होने लोगों में नाराजगी है। हिउस ने मांग की है कि अनंत चौदस तक मंदिरों के निकट सुबह-शाम विशेष सुरक्षा दस्ता एवं साफ सफाई की व्यवस्था की जाएं।

आज प्रत्येक व्यक्ति में क्षमा भाव आ जाए तो विश्व में शांति आ जाएगी- मुनिश्री पदम सागरजी

गुना। आत्मा में अनेकों विकारी भाव भरे हैं, उन्हें निकालने के लिए बहुत मेहनत करनी पड़ती है। जिस तरह एक पेड़ की लकड़ी से लाखों माचिक की तिलिया बनाई जा सकती है, पर उसका दुरूपयोग कर एक तिली से सारे संसार को नष्ट किया जा सकता है। इसी प्रकार आज हमें क्रोध रूपी चिंगारी दूसरों के प्रति ईष्र्या, द्वेष कराकर दुर्गति का कारण बना रही है। जो व्यक्ति दूसरों के दुर्गुण देखता है, पर की निंदा करता है। वह दुर्गति का पात्र बनता है। लेकिन जो दूसरों की प्रशंसा करता है वह सद्गति का पात्र बनता है। उक्त धर्मोपदेश मुनिश्री पदम सागरजी महाराज ने चौधरी मोहल्ला स्थित पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर में पर्वाधिराज पर्यूषण के प्रथम दिन उत्तम क्षमा धर्म पर धर्मसभा को संबोधित किए व्यक्त किए। इस अवसर पर मुनिश्री विस्वाक्ष सागरजी महाराज भी मंचासीन रहे। मुनिश्री पदम सागरजी महाराज ने कहा कि क्षमा उसे कहते हैं जो कोई कुछ भी कहे पर समता परिणाम रखता है एवं गलती करने वाले को भी क्षमा कर दें। आज यदि प्रत्येक व्यक्ति में क्षमा आ जाए तो विश्व में शांति आने में देर नहीं लगेगी। यदि भोजन में नमक, गाड़ी में ब्रेक, मंदिर में मूर्ति और अस्पताल में डॉक्टर न हो तो तब तक उसका कुछ महत्व नहीं होता। उसी प्रकार इस सुंंदर शरीर में कितने ही गुण भरे हो पर यदि जीवन में क्षमा गुण नहीं है तो सब गुण काम के नहीं है। मुनिश्री ने कहा कि क्षमा भी उत्तम होना चाहिए। क्षमा प्राप्त नहीं की जा सकती। क्षमा तो हमारा स्वभाव है, त्रिकालवर्ती होता है, तात्कालिक नहीं होता। क्रोध, ईष्र्या, द्वेष विकारी भाव तात्कालिक होते हैं। हमने आज क्रोध को स्वभाव मान रखा है, गलत धारणा है। इसलिए अंतरंग भावों से भक्ति, पूजन, स्वाध्याय, ध्यान कर अपना मानव जीवन सफल बनाना चाहिए।
इस अवसर पर पर्यूषण के प्रथम दिन उत्तम क्षमा दिवस मंदिरों पर कई धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित हुए। शाम को मंदिरों पर भगवान की आरती, स्वाध्याय उपरांत सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन हुए। पर्वाधिराज पर्यूषण पर्व के प्रथम दिन उत्तम क्षमा पर चौधरी मोहल्ला स्थित पाश्र्वनाथ दिगंबर जैन मंदिर सहित शहर के अन्य मंदिरों पर भक्तों का तांता लगा रहा। इसी क्रम में मंदिर पर प्रात: 6:30 बजे से भगवान का अभिषेक, शांतिधारा, दशलक्षण धर्म पूजन की गई। बजरंगगढ़ स्थित पुण्योदय शांतिनाथ दिगंबर जैन मंदिर पर भी संगीतमय पूजन हुर्ई। जैन समाज के महेन्द्र बांझल ने बताया कि रात्रि में बड़ा जैन मंदिर पर अंशुल शास्त्रीजी सांगानेर के प्रवचन होंगे। वहीं पर्यूषण पर्व के दूसरे दिवस नगर जैन मिलन द्वारा रात्रि में टेलेंड शो का आयोजन किया जाएगा।

गणपति पूजन के साथ हुआ दस दिवसीय श्रीगणेशोत्सव का भव्य शुभारंभ, मंदिरों एवं धार्मिक केंद्रों पर हुए गणपतिजी के पांडाल स्थापित

गुना। अंचल में दस दिवसीय श्रीगणेशोत्सव का भव्य शुभारंभ हुआ। विराट हिन्दू उत्सव समिति के तहत धार्मिक केंद्रों एवं चिंतन हाउस में श्री गणपति जी की स्थापना की गई। विधि विधान से श्री गणपति जी की पूजा, अर्चना कर कोरोना संकट से निजात पाने के लिए विशेष प्रार्थना की गई। इस अवसर पर चिंतन हाउस, सदर बाजार में शुभ मुर्हुत मध्यान्ह काल में सोशल डिस्टेंसिंग एवं कोविड-19 की सरकारी गाईड लाईन का पालन करते हुए मृत्तिका के श्रीगणेशजी की स्थापना की गई। इस अवसर पर गाणपत्य संप्रदाय के प्रमुख ग्रंथ गणेश गीता का पाठ एवं बौद्धिक कार्यक्रम आयोजित हुआ। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए हिउस प्रमुख कैलाश मंथल ने कहा कि भगवान श्रीगणपति की कृपा से ही श्रेष्ठ बुद्धि, बल एवं वाणी व लेखनी की प्राप्ति होती है। मां लक्ष्मी एवं देवी सरस्वती भी तभी प्रसन्न होती हैं जब श्रीगणेश जी की ही सर्वप्रथम पूजा की जाए। श्रीगणेश जी ही भारत गणतंत्र के सर्वप्रथम गणाधिपति हैं। इसलिए श्रीगणेश को गणपति कहा गया है। पंच देवताओं में सर्वप्रथम पूज्यनीय श्रीगणेश जी हैं। शिव, शक्ति, विष्णु एवं सूर्य देवता एवं श्रीगणेश में जो एकता समभाव देखता है वही सच्ची पूजा है।
श्री मंथन ने कहा भारतीय संस्कृति सनातन धर्म में सर्वप्रथम पूज्यनीय देवता हैं श्री गणाधिपति गणेश। हिन्दू धर्म में बगैर श्री गणेश जी की सर्वप्रथम पूजा के बिना कोई भी कार्य की सिद्धि होना असंभव है। श्रीगणेश की कृपा से ही रिद्धि सिद्धि एवं शुभ लाभ की प्राप्ति होती है। कैलाश मंथन ने कहा कि श्री गणेशोत्सव हमारी सामाजिक एकता का प्रतीक है। प्राचीनकाल से ही देवाधिदेव श्रीगणेश जी को प्रथम पूज्य माना गया है। श्री गणपति अर्थात गणतंत्र के प्रथम पूज्य देव। चतुर्थी से लेकर डोल ग्यारस, अनंत चौदस तक संपूर्ण देश में धार्मिक सामाजिक एकता के दर्शन होते हैं। ‘संघे शक्ति कलियुगेÓ गणेशोत्सव भारतीय गणतंत्र का प्रतिनिधि उत्सव है। आदिकाल से ही श्री गणेशोत्सव सामाजिक समरसता, एकता, संगठन शक्ति का प्रतीक रहा है। मुगल एवं अंग्रेजी शासन काल में लुप्त प्राय: हो गई गणेशोत्सव की परंपरा का पुनर्जागरण महाराष्ट्र प्रांत से लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने करवाया। बाद में गणेशोत्सव राष्ट्रीय स्वाधीनता का प्रमुख आंदोलन बन गया। 17 सितंबर को डोल ग्यारस एवं 19 सितंबर को अनंत चौदस पर कोविड-19 गाईडलाईन का पालन करते हुए विशेष भव्य कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।