होली दहन पर कुंडली के अशुभ प्रभाव एवं वास्तु दोष दूर करने के सरल उपाय : ज्योतिषाचार्य पँडित युवराज राजोरिया, (कुँभराज)

गुना । विशेष ति‍थियों और अवसरों पर शुभ-अशुभ शक्तियां ब्रह्मांड में सक्रिय हो जाती है. उन्हीं को अनुकूल बनाने के लिए उपाय किए जाते हैं. होली का त्यौहार  उनमें से एक है  | 
शास्त्रों के अनुसार चार सिद्ध रात्रियों में से एक होलिका दहन वाली रात भी होती है और ऐसे में नकारात्मक शक्तियों के प्रभाव से बचने के लिए होलिका दहन को सबसे शुभ माना जाता है . 
जन्म कुंडली के ग्रहो के दोषो और वास्तु दोषो के निवारण के लिए होली की रात्रि को अति महत्त्वपूर्ण बताया गया है जिसमें संकल्प लेकर किए जाने वाले ज्योतिषीय उपायों का लाभ अवश्य प्राप्त होता है। 
शास्‍त्रों के अनुसार, इस रात का महत्‍व भी दीपावली और शिवरात्रि जैसा ही होता है। जिस तरह दीपावली और शिवरात्रि के दिन रातों को दैवी शक्तियां जागृत रहती हैं, उसी प्रकार होलिका दहन की रात को भी ऐसा ही होता है
मान्‍यताओं के अनुसार, होलिका की सात परिक्रमा करनी चाहिए। इससे रोग और नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होता है। होलिका प्रदक्षिणा के दौरान 140 डिग्री फारनहाईट तक का ताप शरीर में लगने से मानव के शरीरस्थ समस्त रोगात्मक जीवाणुवों को नष्ट कर देता है।

 होली पर बाधाओं को  दूर  करने के लिए विशेष उपाय, उपाय का प्रभाव 
1. आर्थिक परेशानियों को दूर करने के लिए होलिका की राख को लाकर पूरे घर में छिड़क दें। इससे घर से नकारकत्मक शक्तियों का प्रभाव दूर होता है
2. होलिका की राख को एक पोटली बनाकर तिजोरी में रखें इससे संचित धन बढ़ता है। टोने टोटके का भय होने पर इस राख से तिलक भी कर सकते हैं। इससे आत्मबल मिलता है। 
3. होलिका की राख शरीर में लगाकर गर्म जल से स्नान कराने से नकारात्मक प्रभाव निर्मूल हो जाता है। 
4. होली की भस्म (राख) को मस्तक पर गले में लगाएं इससे स्वास्थ्य सुख बना रहेगा।
5. होलिका की राख अपने घर के आग्नेय कोण (पूर्व दक्षिण) में उस अग्नि को तांबे या मिट्टी के पात्र में रखें और निकट सरसों के तेल का दीपक जला दें। इस उपाय से घर की सारी नकारात्मक ऊर्जा जलकर समाप्त हो जाएगी। 
6. आप होली के दिन एक काले रंग का कपड़ा लें और उसमें काली हल्दी को बांध दें। घर का परिवेश सकारात्मक हो जाएगा और सभी परेशानियों से मुक्ति मिल जायेगी। 
7 . शीघ्र विवाह के योग के लिए – होली के दिन सुबह एक साबुत पान पर साबुत सुपारी एवं हल्दी की गांठ शिवलिंग पर चढ़ाएं 
8. वैवाहिक सुख प्राप्ति के उपाय –  होली के दिन  घर के बीच में एक चैकोर टुकड़ा साफ कर के उसमें आसन लगा कर कामदेव का पूजन करें। इससे वैवाहिक जीवन सुखमय रहेगा। 
9. पढाई में  बच्चे का मन लगाने के लिए  बच्चे के हाथ से नारियल पान सुपारी का दान होलिका के स्थान पर कराएं 
10. होली के दिन चांदी के पात्र में कच्चा दूध डालकर चन्द्रमा को अघ्र्य दें, पति-पत्नी के आपसी संबंधों में मधुरता आयेगी। 
11. जिस दिन होलिका का दहन किया जाता है उस दिन आप होलिका दहन में आटा और जौ चढ़ाएं। इस उपाय से घर के क्लेश मिट जाते हैं। श्री राजोरिया के शास्त्रोक्त मतानुसार
ग्रहो के दोष दूर करने के लिए होलिका दहन में विशिष्ट वस्तु की आहुति
प्रत्येक ग्रह के अनुसार अलग-अलग समिधा (लकड़ी / टहनी ) का उपयोग किया जाता है 
सूर्य के लिए मदार, मदार की समिधा से रोगों का नाश होता है। समाज में मान-सम्मान और बड़ा पद प्राप्त होता है | –
चंद्र के लिए पलाश, पलाश की समिधा सभी कार्यों में उन्नति, लाभ देने वाली है। मानसिक शांति बढ़ाता है।
मंगल के लिए खेर, जमीन से जुड़े व्यापार में सफलता मिलती है , रक्त से संबंधित रोगो को नाश करता है 
बुध के लिए चिड़चिड़ा, नौकरी और बिजनेस के लिए शुभ 
गुरु के लिए पीपल, पीपल की समिधा संतान, वंश वृद्धि, के लिए उत्तम है ,सुखमय वैवाहिक जीवन
शुक्र के लिए गूलर, गूलर की स्वर्ण , धनवान , समस्त प्रकार के सुख व समृद्धियों का भोग प्रदान करने वाली
शनि के लिए शमी, शमी की पाप और रोगो का नाश करने वाली
राहु के लिए दूर्वा – दीर्घायु प्रदान करती है , शत्रुओ एवं गलत आदतों से बचने के लिए और केतु के लिए कुशा – कुशा की समिधा सभी मनोरथ , , प्रसिद्धि और उच्च पद के लिए
वास्तु दोषो के निवारण के लिए अति उत्तम होली दहन   की राख – चमत्‍कारी लाभ
तंत्र शास्त्र के अनुसार होलिका की राख से कई तरह की नकारात्मक शक्तियों का असर व्यक्ति के ऊपर से हट जाता है। 
होली दहन के दूसरे दिन होली की राख को घर लाकर उसमें थोडी सी राई और खड़ा नमक मिलाकर किसी बर्तन में रख लें. ये बर्तन घर में किसी सुरक्षित जगह रखें. | इस उपाय से नजर दोष और बुरे समय से मुक्ति मिल सकती है. पैसों की तंगी दूर होती है. | इससे गृह कलह और आर्थिक बाधाएं दूर होती हैं। 
उपर्युक्त एवं मनोरथ प्राप्ति के लिए आम, पलाश, अशोक, चंदन आदि वृक्ष की समिधाओं का ज्योतिषीय सलाह से कुंडली के अवलोकन द्वारा चयन करके होलिका दहन में आहुति देनी चाहिए |

पूजा-पाठ ,  जन्म कुंडली के ग्रहो के दोषो और वास्तु दोषो के निवारण के लिए  व साधना की दृष्टि से भी होली की रात्रि को अति महत्त्वपूर्ण बताया गया है जिसमें संकल्प लेकर किए जाने वाले उपायों का लाभ अवश्य प्राप्त होता है।

कलश यात्रा एवं ध्वजारोहण के साथ शुरू हुआ सिद्धचक्र महामण्डल विधान

रूठियाई। कस्बे में आठ दिवसीय श्री सिद्धचक्र महामण्डल विधान आराधना महोत्सव का शुभारंभ सोमवार को भव्य कलश यात्रा के साथ हुआ। जैन मिलन प्रचार मंत्री अमित जैन सैंकी ने आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के आशीर्वाद से उनके शिष्य मुनिश्री पदम सागरजी एवं मुनिश्री विशवाक्ष सागरजी महाराज ससंघ के सानिध्य में कलश यात्रा मगलोदय तीर्थ से प्रारम्भ होकर आदिनाथ दिगम्बर जैन नरोनी मंदिर, एबी रोड, सदर बाजार होकर पुन: मगलोदय तीर्थ पहुँची। इस मौके पर कलश यात्रा का जगह-जगह पुष्पवर्षा कर स्वागत किया गया। कलश यात्रा में जैन समाज की महिलाएं सिर पर मंगल कलश धारण किए हुए चल रही थी। कार्यक्रम स्थल पर विधानाचार्य अरविंद कुमार जैन शास्त्री जबलपुर द्वारा मंत्रोच्चरणों के साथ घट स्थापना का कार्य सम्पन्न कराया गया। इस अवसर पर ध्वजारोहण कर्ता प्रकाशचंद, संजीव कुमार, सोनू जैन अशोकनगर ने ध्वजारोहण किया। वहीं विधान में सौधर्म इंद्र रमेश चंद आशीष कुमार मुरादपुर परिवार, ईशान इंद्र  संतोष कुमार संजय, कुमार शांशक कुमार, सौरभ कुमार, अमन चौधरी परिवार, सनतकुमार इंद्र अशोक कुमार, अंकुर सराफ परिवार एवं महेंद्रा इंद्र महेंद्र कुमार मितेश कुमार बाँझल बने। इस अवसर पर शांतिधारा रमेशचंद्र कपिल कुमार निखिल जैन धरनावदा परिवार ने की। जबकि महाआरती अशोक जैन परिवार ललितपुर परिवार ने की। विधान में श्रीपाल पवन कुमार अमित जैन सेंकी परिवार, मंगलकलश स्थापना शैलेष कुमार राजेश चौधरी, संतोष चौधरी, रमेश जैन, ऋषभ जैन, अशोक जैन डल्ले, नवीन जैन ने किया। जबकि दीप प्रज्वलन दीपक जैन आरोन ब्र जिनेश जैन रुठियाई ने किया।

28 मार्च को होली पूजन एवं दहन, 29 को धुलेंडी फागोत्सव पर सैकड़ों वैष्णवों ले रहे ब्रह्म संबंध-दीक्षा

गुना। विराट हिन्दू उत्सव समिति के तहत 28 मार्च को होली पूजन एवं दहन 29 मार्च को धुलेंडी एवं 2 अप्रैल को रंग पंचमी पर कार्यक्रम संपन्न होंगे। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने होली पर गुना एवं अशोकनगर करीला धाम में तगड़ी सुरक्षा व्यवस्था, पेयजल एवं निरंतर विद्युत आपूर्ति की मांग मप्र सरकार एवं प्रशासन से की है। 40 दिवसीय फाग महोत्सव के तहत मध्यभारत मालवा, बुंदेलखंड अंचल के पुष्टि भक्ति केंद्रों पर बसंत पंचमी से चल रहे फाग महोत्सव का समापन दोलोत्सव धुलेंडी के साथ संपन्न होगा। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि पुष्टिभक्ति मार्ग में डेढ़ माह तक फाग महोत्सव के तहत श्री ठाकुरजी के साथ रंग गुलाल से होली खेली जाती है। बसंत फाग पर्व उल्लास, उमंग एवं जीवन में रंग भरने का महोत्सव है। फाग महोत्सव के तहत सत्संग मंडलों एवं श्रीनाथ जी के मंदिरों में श्रद्धा भक्ति के साथ नित्य नए रंगों से श्रीनाथ जी को दुलार किया जा रहा है। जिले के ग्रामीण अंचलों में धुलेंडी तक भक्तगण कृष्ण भक्ति के रंग में डूबे रहेंगे।
ब्रह्म संबंध दीक्षा श्री ठाकुर जी की शरणागति का मार्ग-गोवद्र्धनेश जी
अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय परिषद के जिलाध्यक्ष कैलाश मंथन ने बताया कि जिले के बमोरी भौंरा क्षेत्र में फाग महोत्सव के तहत विराजमान श्री दर्शनबाबा गोस्वामी गोवद्र्धनेश जी के सानिध्य में सैकड़ों वैष्णवों ने ब्रह्म संबंध दीक्षा ली। खासखेड़ा, खुटियारी, लोडेरा, घट्टी, अरण्यापार, सारसेला, बरोदिया, सावरामोदी, भिडरा, रतनपुरा, बिलोदा, विशनपुरा, ऊमरी, छबड़ा, आरी, खुरई, नाहरगढ़, लालोनी, बागेरी, पांचौरा, सहित करीब आधा सैकड़ा ग्रामों में होली महोत्सव के तहत ब्रह्म संबंध, फाग महोत्सव, पलना नंद महोत्सव आदि कार्यक्रमों के दौरान हजारों वैष्णवों ने उपस्थिति दर्ज कराई। श्री दर्शन बाबा ने वैष्णवों को नाम स्मरण एवं ब्रह्म संबंध को श्री ठाकुरजी के शरणागति का मार्ग बताया। 40 दिवसीय होली-फाग महोत्सव का समापन दोलोत्सव 29 मार्च धुलेंडी के साथ संपन्न होगा। वहीं गोस्वामी श्री विनय कुमार, गोस्वामी श्री शरदकुमार एवं श्री मधुरम बाबा ने भी आधा सैकड़ा से अधिक ग्रामों में फागोत्सव में शिरकत कर सैकड़ों वैष्णवों को ब्रह्मसंबंध दीक्षा दी एवं पुष्टिभक्ति मार्ग में शरणागति दी। परवाह, बमोरी, मगरोडा, लालोनी, ऊमरी, भौंरा सहित अनेकों ग्रामों में वल्लभकुल गोस्वामी बालकों द्वारा पुष्टिभक्ति का प्रचार किया जा रहा है एवं बड़ी संख्या में वैष्णवों को पुष्टि संप्रदाय में दीक्षित किया जा रहा है।
पुष्टिभक्ति संप्रदाय में भगवान कृष्ण का अनुग्रह ही प्रमुख है- कैलाश मंथन
बमोरी अंचल देश में पुष्टिभक्ति का बड़ा केंद्र बन गया है। अंचल के करीब 250 ग्रामों में फागोत्सव के तहत होली के रसियों की धूम सुनाई दे रही है। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद मप्र के प्रचार प्रमुख एवं जिलाध्यक्ष कैलाश मंथन के मुताबिक अकेले गुना जिले के सैकड़ों गांवों से 50 हजार से अधिक परिवारों में भगवान श्रीकृष्ण की सेवा विराजमान है। मध्यभारत मालवा अंचल में लीलास्थ महाराजश्री पुरूषोत्तम लाल जी एवं महाराज श्री प्रथमेश जी ने भगवान कृष्ण की पुष्टि भक्ति का प्रचार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निर्वाह की है।

महाशिवरात्रि के दूसरे दिन भी केदारनाथ पर उमड़े श्रद्धालु, आज होगा दिन दिवसीय कार्यक्रम का समापन ओम नम: शिवाय के अखंड जाप से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं- कैलाश मंथन

गुना। शिवरात्रि के दूसरे दिन भी केदारनाथ धाम पर आदिवासी ग्रामीणों की उपस्थिति रही। केदारनाथ क्षेत्र में जंगल में मंगल के साक्षात दर्शन होते हैं। अल सुबह से ही दर्शनार्थियों का तांता लगा रहता है। जो लगातार तीन दिन तक चलता है। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि कार्यक्रम का समापन 13 मार्च को होगा। इस अवसर पर कैलाश मंथन ने कहा कि भगवान शिव महाकाल की भक्ति से कल्याण की प्राप्ति होने के साथ सुख-समृद्धि एवं मानसिक शांति प्राप्त होती है। ओम नम: शिवाय के अखंड जाप से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। हिउस के तहत 108 शिव मंदिरों में भगवन्नाम जप अभियान एवं महारूद्राभिषेक के महत्वपूर्ण कार्यक्रम संपन्न हुए।
महाशिवरात्रि मेला नहीं लगने से श्रद्धालुओं में छाई निराशा
श्री मंथन ने कहा कि कोविड-19 के चलते भले ही जिले के प्राचीन शिवालयों पर धार्मिक मेले का आयोजन नहीं हुआ, लेकिन उसके बावजूद आम जनता में उत्साह देखने को मिला। शासन की कोराना गाईडलाईन का पालन करते हुए बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने केदारनाथ सहित अन्य धार्मिक स्थलों पर पहुंचकर शिवालयों में रूद्राभिषेक किया। प्रशासन की सख्ती के चलते अंचल में प्राचीन स्थलों पर लगने वाले मेले न लगने से भगवान शिव के भक्तों में निराशा छाई रही। हजारों श्रद्धालु वाहन न चलने से केदारनाथ में भोलेनाथ के दर्शनों से वंचित रह गए।
मेले पर प्रतिबंध के बावजूद नहीं आई श्रद्धालुओं की भक्ति की कमी
उल्लेखनीय है कि महाशिवरात्रि पर्व पर अंचल के प्राचीन शिवालयों एवं शिव मंदिरों में में आस्था का जनसैलाब उमड़ा। विराट हिन्दू उत्सव समिति के अध्यक्ष कैलाश मंथन के मुताबिक शिवरात्रि पर्व पर प्रात: काल तड़के से ही शिव मंदिरों में रूद्राभिषेक एवं ओम नम: शिवाय महामंत्र के अखंड जाप शुरू हुए। केदारनाथ धाम, मालपुर सहित प्रमुख शिवालयों में कोविड-19 नियमों का पालन करते हुए श्रद्धा भक्ति पूर्वक भगवान भोलेनाथ की पूजा अर्चना की। सुरक्षा व्यवस्थाओं के बीच बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने केदारनाथ धाम एवं शहरी क्षेत्रों के शिव मंदिरों में भगवान शिव के दर्शन किए। कोविड-19 के चलते प्रशासन द्वारा मेलों पर लगाए गए प्रतिबंध के बावजूद श्रद्धालुओं की भक्ति की कमी नहीं आई।
महाशिवरात्रि पर संतों का हुआ सम्मान
इस अवसर पर केदारनाथ धाम सहित प्रमुख शिव मंदिरों में महंतों, पुजारियों एवं प्रमुख धार्मिक कार्यकर्ताओं का सम्मान हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने किया। इस अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में कैलाश मंथन ने कहा कि कलियुग में कल्याण प्राप्ति का एकमात्र साधन है भगवान का नाम जाप। शिव की आराधना से कल्याण की प्राप्ति होती है। ओम नम: शिवाय कल्याणकारी महामंत्र है सबसे जल्द प्रसन्न होने वाले देव हैं महादेव। ऐसे समय में जब धर्म में पाखंडवाद पनप रहा है लोग कर्मकांड के नाम पर ठगे जा रहे हैं आम जनता के लिए नाम जप सहज सुलभ रास्ता है। भोलेनाथ की भक्ति में श्रद्धा सुमन के साथ उनके महामंत्र ओम नम: शिवाय का जाप सरल साधन है।

मुनिश्री विस्वाछ सागर महाराज ने किया केशलोंच दिगंबर जैन संतों के 28 मूलगुणों में शामिल है केशलोंच

रुठियाई। रुठियाई में मुनिश्री विस्वाछ सागरजी महाराज का केशलोंच शुक्रवार को प्रात: संपन्न हुआ। इस दौरान मुनिश्री के स्वयं के द्वारा ही केशलोंच की क्रिया की गई। इस अवसर पर मुनिश्री पदम् सागरजी महाराज साथ थे।  जैन मिलन के प्रचार मंत्री अमित जैन सेंकी ने बताया कि केशलोंच की क्रिया दिगंबर जैन मुनि के 28 मूल गुणों में शामिल है। साधारण शब्दों में मूल गुणों से आशय मुनि धर्म अंगीकार करने के नियम। संत इन सभी मूल गुणों का पालन स्वावलंबन के साथ जीव रक्षा करते हुए धर्म साधना से आत्मनुभव प्राप्त करने के लिए करते हैं। जो कि जैन धर्म के अनुसार प्राणी मात्र का मूल लक्ष्य है। साधु परमेष्ठी के जो 28 मूलगुण होते हैं जिसमे 5 महाव्रत, 5 समिति, 5 इन्द्रिय निरोध, 6 आवश्यक और 7 शेष गुण। इन अंतिम 7 शेष गुण मे केशलोंच एक विशेष गुण होता है। उल्लेखनीय है कि दिगंबर संतों का संयम मार्ग बहुत ही कठिन होता है। उनके जीवन चरिया बहुत ही सधी हुई होती है । वे पैदल चलते हैं, भूमि पर शयन करते हैं, और वस्त्र रहित अवस्था में रहते हैं। साथ ही एक समय भोजन करते हैं। आहार के बाद पानी भी नहीं लेते हैं। इस मौके पर बड़ी संख्या में समाजजन उपस्थित थे।

हिउस ने की कोरोना प्रॉटोकॉल का पालन किए जाने की अपील

गुना। विराट हिन्दू उत्सव समिति के तहत केदारनाथ सहित प्राचीन स्थलों पर 11 मार्च को बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के जुटने की संभावना है।  महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में भक्तों की उपस्थिति को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था के लिए विशेष पुलिस फोर्स तैनाती की मांग की है। हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने कहा कि केदारनाथ, मालपुर, बाघबाघेश्वर-चांचौड़ा सहित जिले के अन्य बड़े शिवमंदिरों एवं धर्मस्थलों पर भी सुरक्षा व्यवस्था के चाकचौबंद इंतजाम किए जाएं। सभी धार्मिक स्थलों पर पहुंचने वाले शिवभक्तों से अपील की गई है कि कोरोना के फैलाव को देखते हुए शासकीय प्रॉटोकॉल का पालन किया जाएं एवं मास्क और सेनेटाईजर का उपयोग अवश्य किया जाएं।
कोरोना काल की शांति के लिए महाशिवरात्रि पर 108 मंदिरों में होंगे महारूद्राभिषेक
भगवान शंकर सदाशिव भोलेनाथ हैं, शिवशंकर मात्र जल चढ़ाने से ही प्रसन्न हो जाते हैं। महादेव की पूजन अर्चन, वंदन से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। कोरोना काल की शांति के लिए प्रशासनिक प्रॉटोकॉल का पालन करते हुए विराट हिन्दू उत्सव समिति एवं चिंतन मंच के तहत महाशिवरात्रि पर्व पर अंचल के प्रमुख 108 शिव मंदिरों, प्राचीन सिद्ध स्थलों केदारनाथ, मालपुर के महारूद्राभिषेक आयोजनों में भक्तों ने श्रद्धा सहित भगवान शंकर की पूजन कर अभिषेक किया जाएगा। प्रमुख शिव मंदिरों में महाशिवरात्रि के दिन बड़ी संख्या में भक्तों की भीड़ उमडऩे की  संभावना के चलते प्रशासन से सभी सुरक्षा व्यवस्था एवं कोरोना से बचाव हेतु आवश्यक कदम उठाने की मांग की है।
महाशिवरात्रि पर कोरोना संकट से निजात पाने होगी शिव की आराधना
शहर में हनुमान चौराहा, सहस्त्रमुखी महादेव, जयस्तंभ चौराहा, आरटीओ पंचमुखी महादेव, जागेश्वर महादेव जाटपुर, सिद्धेश्वर झिरिया मंदिर, पिपलेश्वर महादेव, अस्पताल परिसर, कैंट चौराहा, शिव मंदिर सहित शहर एवं अंचल में अनेकों मंदिरों में भारी सज्जा एवं भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार पूजन अर्चन, अभिषेक कार्यक्रम होंगे।

8 सेे 22 मार्च तक श्री गोवर्धनेश जी के सानिध्य में चलेंगे आयोजन, द्वापरयुगीन है होली के रसियों के गायन की परंपरा-कैलाश मंथन

गुना। अंचल में 8 से 22 मार्च तक ग्रामीण अंचलों में गोस्वामी श्री दर्शन कुमारजी महोदयश्री के सानिध्य में फागोत्सव का आयोजन होगा। इस दौरान खुटियारी, लोडेरा, घट्टी, अरव्यापार, सारसेला, खासखेड़ा, खुटियारी, आरी, बरोदिया, सावरामोदी, भिडरा, खुरई सुहाया, रतनपुरा आदि गांवों में युवा अचार्य श्री गोवर्धनेशजी के सानिध्य में वैष्णवजन श्री ठाकुर जी के साथ भक्ति के रंग में होली खेलेंगे।
उल्लास, उमंग एवं जीवन में रंग भरने का महोत्सव है फागोत्सव – कैलाश मंथन
40 दिवसीय फाग महोत्सव के तहत मध्यभारत मालवा, बुंदेलखंड अंचल के पुष्टि भक्ति केंद्रों पर बसंत पंचमी से चल रहे 40 दिवसीय होली-फाग महोत्सव का समापन दोलोत्सव धुलेंडी के साथ संपन्न होगा। अंतर्राष्ट्रीय पुष्टिमार्गीय वैष्णव परिषद के प्रांतीय प्रचार प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि पुष्टिभक्ति मार्ग में डेढ़ माह तक फाग महोत्सव के तहत श्री ठाकुरजी के साथ रंग गुलाल से होली खेली जाती है। बसंत फाग पर्व उल्लास, उमंग एवं जीवन में रंग भरने का महोत्सव है। फाग महोत्सव के तहत सत्संग मंडलों एवं श्रीनाथ जी के मंदिरों में श्रद्धा भक्ति के साथ नित्य नए रंगों से श्रीनाथ जी को दुलार किया जा रहा है। जिले के ग्रामीण अंचलों में धुलेंडी तक भक्तगण कृष्ण भक्ति के रंग में डूबे रहेंगे।
हिउस प्रमुख कैलाश मंथन ने बताया कि द्वापर युग से चली आ रही परंपरा के अनुसार श्रीमद् वल्लभाचार्य के समय से आचार्यों ने होली महोत्सव पर 40 दिवसीय बसंत पंचमी से धुलेंडी तक विशेष मनोरथ फाग आंनदोत्सव की परंपरा प्रारंभ की। ब्रज प्रदेश की इस परंपरा में श्रीकृष्ण के भक्त होली के रसियों एवं भक्त कवियों के पदों का गायन कर अबीर, गुलाल, पुष्पों से श्री ठाकुर जी के साथ होली उत्सव का आनंद लेते हैं। श्री मंथन ने बताया अंचल के एक सैकड़ा से अधिक ग्रामों में फाग महोत्सव पर श्री वल्लभ कुल गोस्वामी आचार्यों के सानिध्य में श्री ठाकुर जी से लाड़ लड़ाया जाता है। गुना, बमोरी, लालोनी, परवाह, भौंरा क्षेत्र के आधा सैकड़ा ग्रामों में पुष्टिमार्गीय आचार्य एवं गोस्वामी श्री विनय कुमार, गोस्वामी श्री शरद कुमार, गोस्वामी श्री रवि कुमार जी, मधुरम बाबा के सानिध्य में हजारों वैष्णवों ने फाग महोत्सव के तहत हुए रंगारंग आयोजनों में हिस्सेदारी की।

आरोन में आचार्यश्री विद्यासागर संयम कीर्ति स्तम्भ का हुआ शिलान्यास

आरोन। कस्बे में आचार्यश्री विद्यासागर संयम कीर्ति स्तम्भ का शिलान्यास कार्यक्रम गुरुवार को हुआ। मुनिश्री अभय सागरजी, प्रभात सागरजी, निरीह सागरजी, आर्यिका पवित्रमति, वरदमति एवं करणमति माताजी की मंगल प्रेरणा से ब्रम्हचारी मनोज जैन लल्लन भैया के मार्ग दर्शन में यह शिलान्यास स्थानीय जैन गौशाला में किया गया। आरोन जैन समाज के सुनील झंडा ने बताया कि आचार्यश्री विद्यासागरजी महाराज के मुनिदीक्षा के 50 वर्ष पूर्ण पर जैन समुदाय द्वारा संयम स्वर्ण महोत्सव के रूप में संपूर्ण भारत वर्ष में जगह-जगह संयम कीर्ति स्तंभों का निर्माण कर रहा है। आरोन जैन समाज भी इस संयम कीर्ति स्तम्भ बनाने के लिए पूर्व से संकल्पित थी। विगत दिवस इस संयम कीर्ति स्तम्भ के निर्माण हेतु स्थानीय जैन गौशाला में शिलान्यास किया गया। ब्रम्हचारी मनोज जैन लल्लन भैया के मार्गदर्शन में गौशाला में जहां आचार्यश्री विद्यासागर संयम कीर्ति स्तम्भ का शिलान्यास किया, वहीं वर्धमान कॉम्प्लेक्स में भी पूर्व में स्थापित एक कीर्ति स्तम्भ के पुनर्निर्माण हेतु भी शिलान्यास किया गया।
उक्त शिलान्यास कार्यक्रमों में संतोष उनारसी, राजेंद्र झंडा, डॉ.नीलेश जैन, संजय जैन, संजीव रामपुर, राजेश जैन, सुधीर कलेशिया, संजीव कांसल, संटू कांसल, संजीव केपी, लल्लू रामपुर, सचिन रामपुर, आशीष कलेशिया, राजेंद्र चौधरी, दीपक ब्रदर्स, विक्की पारस, प्रवीण जैन आदि की उपस्थिति में शिलान्यास कार्यक्रम संपन्न हुआ।

अग्रवाल महिला मंडल द्वारा किया गया गणगौर मेला उत्सव का आयोजन

गुना । नगर में पहली बार अग्रवाल महिला मंडल द्वारा गणगौर मेला उत्सव का आयोजन किया गया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि अशोक अग्रवाल क्षेत्र सेवा प्रमुख राष्ट्रीय सेवा संघ ने इस मेला उत्सव का शुभारंभ करते हुए नारी शक्ति पर उद्बोधन दिया एवं गुना नगर में अग्रवाल महिला मंडल द्वारा किये जा रहै सेवा कार्यों का भी उल्लेख किया ,विशिष्ट अतिथि अग्रवाल ट्रस्ट के अध्यक्ष राजेंद्र अग्रवाल ने भी अपना उद्बोधन दिया स्वागत भाषण महिला मंडल अध्यक्ष अंजना सिंगल ने दिया  एवम्  आभार नीलम मंगल ने ज्ञापित किया कार्यक्रम का संचालन शोभा वैश्य एवं सीए आयुषी सिंघल द्वारा किया गया कार्यक्रम के प्रारंभ में गणेश वंदना तारा एवं मीठी द्वारा किया गया तत्पश्चात कार्यकारिणी की बहनों के द्वारा वूमेंस डे के उपलक्ष में नारी शक्ति पर एक लघु नाटिका प्रस्तुत की गई साथ ही घूमर नृत्य भी प्रस्तुत किया गया इसके बाद गणगौर उत्सव के दोहे प्रतियोगिता एवं बालिका वहां महिलाओं के लिए अलग-अलग वर्ग में ईशर गणगौर प्रतियोगिता रखी गई साथ हीआहुजी  एवं लकी ड्रा रखा गया जिसमें मिक्सर ग्राइंडर हैंड ग्राइंडर एवं अन्य कई तरह की गिफ्ट  दी गई, गणगौर उत्सव मेले में इंदौर ,ग्वालियर मऊ ,रुठियाई ,गुना से कपड़े ज्वेलरी बेडशीट बैग होममेड केक आइसक्रीम कई तरीके की चाट आदि की शानदार सजावट के साथ दुकानें लगाई गई दुकानों को गणगौर की टीम के अनुसार सजाया गया एवं पुरस्कार भी दिए गए इस मेले में अग्रवाल ट्रस्ट के सचिव सुनील अग्रवाल एवं ट्रस्ट के सभी पदाधिकारी भी उपस्थित रहे महिला मंडल के उपाध्यक्ष नीलम बिंदल एवं समस्त पदाधिकारी एवं कार्यकारिणी की सभी बहने उपस्थित रही समाज के सभी महिला एवं पुरुष वर्ग ने इस मेले की एवं आयोजकों की भूरी भूरी प्रशंसा की ।

श्रीराम कथा में भगवान राम के नामकरण संस्कार व अहिल्या उद्धार का मोहक वर्णन

गुना।  शहर के कैंट गुलाबगंज क्षेत्र में स्थित ग्वाल बगीचा में कॉलोनी वासियों द्वारा आयोजित संगीतमय श्रीराम कथा में कथा व्यास अंजली त्यागी ने भगवान राम के नामकरण की कथा का मनोहारी चित्रण किया। उन्होंने कथा में श्री राम के पुष्पवाटिका गमन और अहिल्या उद्धार के अनूठे प्रसंग सुनाकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। व्यासपीठ से राम कथा का वाचन करते हुए सुश्री त्यागी ने कहा कि भगवान राम का चरित्र हमें जहां मर्यादा का पाठ पढ़ाता हेै। इस दौरान उन्होंने श्रीराम के पुष्पवाटिका गमन की कथा का विस्तार से बखान किया। इसमें उन्होंने जनकपुत्री सीता और श्री राम के पहले मिलन की भावनात्मक व्याख्या की। वहीं अहिल्या उद्धार का वर्णन करते हुए कहा कि तेजस्वी भगवान श्रीराम के चरण के छूने भर से पत्थर के रूप में मौजूद अहिल्या अपने पति के श्राप से मुक्त हो गई। व्यासपीठ से कथा का वर्णन करते हुए सुश्री त्यागी ने कहा कि रामचरित मानस की हर चौपाई हमें सात्विकता का संदेश देती है। रामायण हमें जीवन जीने का सही मार्ग दिखाती है। गौरतलब है कि श्रीराम कथा का समापन 7 मार्च रविवार को हवन-पूजन के बाद भंडारे में महाप्रसादी वितरण के साथ होगा।