श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत विधि एवं महत्व, व्रत को विधिपूर्वक करने से होता है त्रिपापों का नाश,कौन से हे त्रिदोष और उनका नाश और क्या होता है लाभ, जानिए ज्योतिर्विद पंडित युवराज राजौरिया के साथ

भगवान श्री कृष्ण का जन्म द्वापर युग में भादो मास कृष्ण पक्ष अष्टमी बुधवार रोहिणी नक्षत्र वृष राशि के चंद्र में अर्धरात्रि में कंश के कारागृह में हुआ था।इस बार श्रीकृष्ण जन्माष्टमी पर्व भादो कृष्ण पक्ष अष्टमी सोमवार दिनांक 30 अगस्त 2021 रोहिणी नक्षत्र वृष राशि के चंद्र में समायुक्तेन  सर्वमान्य रहेगा।इस दिन गोदावरी के पावन तट पर अर्ध कुंभ का संयोग भी बन रहा है।श्री कृष्णजन्माष्टमी का व्रत विधि अनुसार करने से त्रितापों से मुक्ति मिलती है। त्रिताप है पाप, शाप, और ताप,पाप- इस व्रत को करने से मनसा वाचा कर्मणा मन वचन और कर्म से किए गए पापों का नाश होता है।शाप- यदि हमें किसी के द्वारा इस जन्म या पूर्वजन्म में श्राप दिया हो तो इस व्रत पूजन करने से श्रापों से मुक्ति भी मिल जाती है।ताप- त्रिताप होते हैं दैहिक,दैविक, भौतिक, तापों से मुक्ति मिलती है, रामायण में गोस्वामी तुलसीदास जी ने भी इनके बारे में लिखा हे, दैहिक दैविक भौतिक तापा राम राज काहू नहीं व्यापा,श्री कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत विधान पूर्वक करने से भगवान श्री बालकृष्ण की कृपा से संतान सुख, धन-धान्य की वृद्धि, एवं भौतिक सुख समृद्धि सहित सभी मनोरथ सिद्ध होते हे।श्री कृष्ण जन्माष्टमी व्रत की विधि- इस दिन सूर्योदय के पूर्व उठकर नित्य क्रिया से स्नान आदि से निवृत होकर हमें संकल्प लेना चाहिए कि, मैं बाल कृष्ण भगवान की विशेष अनुकंपा हेतु व्रत करूंगा,सर्वान्तर्यामी परमेश्वर मेरे सभी पाप, शाप, तापों का नाश करें, इस दिन ब्रह्मचर्य का व्रत पालन करें, झूठ ना बोलें, क्रोध ना करें, मन कर्म और वचन से किसी को कष्ट ना पहुंचाएं, एवं दिन रात निराहार व्रत करें, यदि निराहार ना रह पाए तो दूधि या फल ले सकते है, शरीर की सभी इंद्रियों के संयम से किया गया व्रत ही मनोवांछित फल प्रदान करता है, केवल अन्न के त्यागने को ही व्रत नहीं समझे, भगवान के दिव्य स्वरूप के दर्शन करें, उनकी कथा श्रवण करें, दान करें, इसे उत्सव पूर्वक मनाने के लिए एक सूतिका ग्रह बनाना चाहिए जिसमें देवकी को सैया पर स्थापन करें, बाल कृष्ण की मूर्ति सयन करावें, वस्त्र  द्रव्य, स्वर्ण, मुक्ता, पंच पल्लव,पुष्प, आधी से ढककर सैया पर शयन करावे,    सूतिका ग्रह  में श्री कृष्ण चरित्र के चित्र जैसे गौचारण, कालिया नाग मर्दन, श्री गिरिराज धरण, बकासुर, अघासुर, तृणावर्त, पूतना आदि का मर्दन, गज, मयूर ,वृक्ष, लता, पताका आदि के सुंदर और दिव्य चित्र कृतियों से सजाएं वेणु बांसुरी वीणा आदि श्रृंगार प्रसाधन सामग्री से युक्त कुंभ हाथ में लिए किंकरों से सेवायमान माता देवकी की बालकृष्ण ओर वशुदेव सहित षोडशोपचार से पूजन अभिषेक आरती करें। वासुदेव देवकी और श्री कृष्ण का जय जयकार लगाएं। 
इस प्रकार विधि पूर्वक श्री कृष्णा जन्माष्टमी का व्रत संपूर्ण पापों का नाश करने वाला है, इसे श्रद्धा ओर नियम संयम पूर्वक करने से  इहलोक परलोक में भौतिक एवं आध्यात्मिक सुखों की प्राप्ति होती है।

Leave a Comment