पत्रकारों पर झूठे आरोप लगाने वालों पर अब होगी कार्यवाही, मामला उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर का, जहाँ अनुपस्थित रहे स्टॉफ द्वारा पत्रकारों पर लगाए गए मंघड़ंत झूठे आरोप, पत्रकार ने पुलिस अधीक्षक को दिया निष्पक्ष जांच हेतु आवेदन

गुना। मामला पुरापोसर उप स्वास्थ्य केंद्र का है। जहां कुछ दिवस पूर्व शिकायत प्राप्त हुई थी जिसमें बताया गया था कि उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर में स्टाफ अपने मनचले अंदाज में ड्यूटी करता है जब जिसकी इच्छा होती है तब आ जाता है और जब जिसकी इच्छा होती है तब वह चला जाता है। उक्त शिकायत पर पत्रकारों द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र पुरापोसर पहुंच कर वहां दिख गया कि दोपहर 11:30 बजे 2 महिला कर्मचारी पहुंची, जिसके साथ ही बाकी स्टाफ अपनी ड्यूटी से नदारद पाया गया।जिसको लेकर न्यूज़ चैनलों व समाचार पत्रों में खबर प्रकाशित की गई।
 दरअसल इस खबर को प्रकाशित करने का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को लेकर नहीं है, बल्कि शासन द्वारा दूरस्थ आंचल में आमजन को दी जाने वाली सुविधाएं लोगों को मिल पा रही है या नहीं ? इसको लेकर पत्रकारों द्वारा कवरेज किया गया।
उक्त मामले की जानकारी जिला कलेक्टर को दी गई। जिस पर कलेक्टर महोदय द्वारा स्वास्थ्य विभाग को जांच के आदेश दिए।अपनी अनियमितता को छुपाने हेतु बौखलाए कर्मचारियों द्वारा खबर प्रकाशन के लगभग 1 हफ्ते बाद पत्रकारों के खिलाफ मनगढ़ंत झूठे आरोपों को लेकर पुलिस अधीक्षक को एक ज्ञापन दिया गया था।
इसी को लेकर समस्त पत्रकार गणों की और से झूठे शिकायत पत्र की निष्पक्ष जांच हेतु पुलिस अधीक्षक के नाम एक ज्ञापन दिया गया।
वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण के चलते सरकारी विभाग के कर्मचारी बेखौफ नजर आते हैं। पत्रकारों द्वारा अनियमितता उजागर करने पर उन पर झूठे मनगढ़ंत आरोप लगा दिए जाते हैं। यह कोई नई बात नहीं है इससे पूर्व में भी अनियमितता उजागर किए जानेपत्रकारों पर ब्लैकमेलिंग के आरोप लगे हैं।
 यह है पूरा मामला

गुना जिले के ग्राम पुरापोसार उप स्वास्थ्य केंद्र का मामला है जहां स्थानीय निवासियों द्वारा शिकायत प्राप्त हुई थी कि उप स्वास्थ्य केंद्र में कर्मचारी समय पर नहीं पहुंचते हैं। जब मन होता है तब आ जाते हैं और जब मन होता है तब चले जाते हैं। इसको लेकर जब मौके पर जाकर देखा तो लगभग 11:30 बजे स्टाफ की दो महिला कर्मचारियों द्वारा उप स्वास्थ्य केंद्र का ताला खोला जाना पाया गया।
अब यहां सवाल यह उठता है कि जब स्टाफ के कुछ कर्मचारी मौके पर मौजूद ही नहीं थे तो फिर शासकीय कार्य में बाधा, व ब्लैक मेलिंग को लेकर झूठा आवेदन क्यों दिया जा रहा है। जिस में अनुपस्थित कर्मचारियों की भी दस्तखत पाए गए हैं।
समाचार पत्रों में इसकी खबर प्रकाशित की गई एवं माननीय कलेक्टर महोदय को भी इसकी जानकारी संज्ञान में दी गई।
 जानकारी संज्ञान में आने पर जिला कलेक्टर द्वारा उक्त मामले में कार्यवाही करने के आदेश दिए गए।

वरिष्ठ अधिकारियों के संरक्षण व नेताओं के दबाव में जांच में लीपापोती की आशंका 

 उक्त मामले में अधिकारियों के संरक्षण की बात सामने आई, जिसमें स्वास्थ्य विभाग के सीएमएचओ महोदय को अनियमितता की जानकारी देने के कई दिनों बाद तक कोई कार्यवाही नहीं की गई थी। इससे इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि उक्त कर्मचारियों को अपने वरिष्ठ अधिकारियों का संरक्षण प्राप्त है।
जानकारी में सामने यह भी आया है कि उप स्वास्थ्य केंद्र में पदस्थ श्रीमती रामवती बाई शर्मा जिनके पति पत्रकार हैं। कहीं ना कहीं पत्रकारिता की आड़ में रामवती शर्मा एवं स्टाफ के अन्य कर्मचारी अपने मनचले अंदाज में नौकरी करते देखे गए है।
जानकारी यह भी सामने आ रही है कि अधिकारियों के संरक्षण व नेताओं के दबाव के चलते उक्त मामले में जांच के नाम पर लीपापोती किए जाने से इनकार नहीं किया जा सकता।
इस मामले में स्थानीय अधिकारियों द्वारा पारदर्शिता को ध्यान में रखते हुए क्या  निष्पक्ष जाँच की जाएगी ?
या अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत के चलते यह धांधली इसी तरह से चलती रहेगी।

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