आखिर किस के संरक्षण में चल रहा है यह गोरखधंधा, जिला शिक्षा विभाग में प्राइवेट स्कूलों को दी जाने वाली मान्यताओं में भारी गड़बड़ी आई सामने

रिपोर्ट : महेश सोनी

गुना । जिला शिक्षा विभाग की कार्य प्रणाली पूर्व से ही सुर्खियों में रही है। विभाग की अनियमितताओं को लेकर  समय-समय पर समाचार पत्रों में खरीद खबरें भी प्रकाशित की जाती रही है मगर प्रशासन की अधिकारियों के कानों में जूं तक नहीं रेंगती है।
शिक्षा विभाग के जिला शिक्षा अधिकारी चंद्रशेखर सिसोदिया से पूर्व में प्राइवेट स्कूलों को दी जाने वाली मान्यता को लेकर होने वाली अनियमितताओं के विषय में चर्चा की गई थी तो उन्होंने बताया मुझे इस संबंध में ज्यादा जानकारी नहीं है, यह मान्यताओं का काम बाबू सुनील जाटव ही देखते हैं, आप इस विषय में उनसे संपर्क कीजिए।

बाबू सुनील जाटव का फोन मिलता है स्विच ऑफ                            बाबू सुनील जाटव को जब भी फोन लगाया गया है, उनका फोन हमेशा स्विच ऑफ बताता है, जिला शिक्षा अधिकारी सिसोदिया इस संबंध में कोई जानकारी देते नहीं है। अब सवाल यह उठता है कि संबंधित मामले में जानकारी कों देगा ?संयोग वश विगत दिवस बाबू जाटव से मिले और उनसे मोबाइल स्विच ऑफ रखने का कारण पूछा गया तो इसके जवाब में अति व्यस्तता रहने का कारण बताया। शासन द्वारा एक महत्वपूर्ण पद की जिम्मेदारी का निर्वहन करने का जिम्मा इन्हें दिया गया है। बावजूद इसके नियमों को ताक पर रखकर प्राइवेट स्कूल संचालकों को मान्यता देने का काम कर रहे हैं।

शिकायत के बाद भी विभाग द्वारा नहीं की जाती है कोई कार्यवाही 

पूर्व में प्राइवेट स्कूल संचालकों को मान्यता देने मैं होने वाली अनियमितताओं के संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी से जाकर मिले  थे और गुना शहर में नियम विरुद्ध संचालित हो रहे स्कूलों के संबंध में  शिकायत भी की गई थी। इस पर उन्होंने सुनील जाटव जी से संपर्क करने का कहा था। इस संबंध में बाबू जाटव को भी जानकारी संज्ञान में दी गई, मगर आज दिनांक तक उनके द्वारा संबंधित मामले में किसी प्रकार की कोई कार्यवाही नहीं की गई है। इसी के चलते प्राइवेट स्कूल संचालकों मनमर्जी चरम पर है। छात्र छात्राओं की पलकों का जमकर शोषण किया जा रहा है। और प्रशासन चुप्पी साधे बैठा हुआ है।
सूत्रों के हवाले से ऐसी जानकारी भी सामने आई है की प्राइवेट स्कूल संचालकों को मान्यता देने की एवज में मोटी रकम भी वसूली जा रही है। शायद इसी के चलते जिला शिक्षा विभाग के अधिकारी कार्यवाही करने से बचते नजर आ रहे हैं।
“इन्हें किसी आला अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है या कुछ और है”
यह समझने वाली बात है क्योंकि जिला मुख्यालय पर शिक्षा विभाग के अधिकारियों द्वारा इस तरह बेखौफ नियमों को ताक पर रखकर कार्य किया जा रहा है।
यह जानबूझकर अनदेखी की जा रही है या इन्हें किसी आला अधिकारी का संरक्षण प्राप्त है ?
 फिलहाल यह एक जांच का विषय है। अब यह देखना होगा कि जिले के मुखिया इस विषय पर संज्ञान लेते हुए आगे क्या कार्यवाही करते हैं ?

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